
12th pass fake doctor treated 7 years old child died (photo:patrika AI)
MP News: उल्टी-दस्त की समस्या से पीड़ित सात साल का बच्चा झोलाछाप डॉटर के इलाज से मौत का शिकार बन गया। जिसने दो ड्रिप लगाई और ड्रिप में कई इंजेशन भी डाले लेकिन कुछ समय बाद ही बच्चे ने दम तोड़ दिया था। इस मामले में 15 महीने बाद जांच कर पुलिस ने झोलाछाप फर्जी डॉटर के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर ली है।
पुलिस ने जब मामले की जांच की तो पता चला कि खुद को डॉक्टर बताकर क्लीनिक खोलकर मरीजों का इलाज कर रहा प्रदीप बुनकर सिर्फ 12वीं पास है और नर्सिंग की पढ़ाई कर रहा है। इससे पुलिस ने उसके बिना किसी डॉक्टर डिग्री खुद को डॉक्टर बताकर इलाज करने का दोषी माना, साथ ही समय पर सही दवा या सही डॉक्टर के पास न भेजने का भी दोषी माना। इसी लापरवाही के चलते बच्चे की मौत होना माना गया। इससे पुलिस ने प्रदीप बुनकर के खिलाफ 15 महीने बाद अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 के तहत एफआइआर दर्ज कर ली है।
मामला जिले के शाढ़ौरा कस्बे का है। कस्बे के इंदिरा कॉलोनी निवासी 7 वर्षीय विशाल पुत्र चंद्रभान आदिवासी की 26 सितंबर 2024 की तबीयत बिगड़ी तो मां ललिताबाई उसे इलाज के लिए सुबह 9 बजे शाढ़ौरा लेकर पहुंची। जहां पर फर्जी डॉक्टर प्रदीप बुनकर ने अपने क्लीनिक में उसका इलाज किया, जहां बच्चे को दो ड्रिप में कुछ इंजेक्शन लगाए और घर भेज दिया।
कुछ समय बाद ही फिर से तबीयत बिगड़ी तो ललिताबाई उसे फिर लेकर पहुंची तो उसने यह कहते हुए कि इलाज कर तो दिया और अब सरकारी अस्पताल जाओ, इससे महिला दोपहर एक बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाढ़ौरा में लेकर पहुंची तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। इससे ललिताबाई ने शाढ़ौरा थाने में शिकायत की थी।
एमपी का यह पहला मामला नहीं है, बल्कि जिले में इसी तरह से झोलाछाप डॉक्टरों का जाल है। खुद को डॉक्टर बताकर यह फर्जी डॉक्टर जिलेभर में क्लीनिक खोलकर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। हालात यह है कि किसी डॉक्टर के यहां कुछ महीने कंपाउंडरी कर यह खुद का क्लीनिक खोल लेते हैं और खुद को डॉक्टर बताकर इलाज करने में जुट जाते हैं। ग्रामीण लोग क्लीनिक देखकर अनजाने में इन फर्जी डॉक्टरों के यहां इलाज कराने पहुंच जाते हैं और कई लोग जिले में इनके इलाज से मौत को शिकार भी बन चुके हैं। इसके बावजूद भी इस पर स्वास्थ्य विभाग कोई गंभीरता नहीं दिखाता है। नतीजतन बेरोकटोक यह धंधा जिलेभर में बेखौफ जारी है।
-कुछ दिन पहले ही शहर की शंकर कॉलोनी में एक फर्जी डॉक्टर क्लीनिक व फर्जी पैथोलॉजी लैब संचालित करते हुए मिला था, स्वास्थ्य विभाग ने उसकी क्लीनिक व पैथोलॉजी को सील कर दिया था।
- शाढ़ौरा में भी पिछले महीने स्वास्थ्य विभाग ने कई ऐसी फर्जी डॉक्टरों की क्लीनिकों को सील किया था, लेकिन इसके बावजूद भी जिले में चल रहे इस अवैध धंधे पर कोई लगाम अब तक नहीं लग सकी है।
- पिछले वर्षों में शहर में भी एक मरीज की मौत हो गई थी, मरीज बुखार का इलाज कराने आया था और डॉक्टर ने उसे ऐसा इंजेक्शन लगाया कि वह उठ ही नहीं पाया और उसकी मौत हो गई थी।
- शहर व कस्बों में ऐसी सैंकड़ों क्लीनिकें संचालित हैं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व प्रशासनिक अधिकारी रोज इन्हें देखते हुए निकलते हैं, लेकिन कार्रवाई तो दूर टोकना तक मुनासिब नहीं समझते हैं।
Updated on:
14 Jan 2026 10:45 am
Published on:
14 Jan 2026 10:37 am
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