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MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद संस्थान में 'एडवांस्ड पंचकर्म थैरेप्यूटिक' विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित किया जा रहा है। इसमें देशभर के विशेषज्ञ आयुर्वेद की प्राचीन विधाओं को आधुनिक संदर्भ में लागू करने पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। कार्यक्रम के दूसरे दिन पंचकर्म की जटिल प्रक्रियाओं और उनके चमत्कारी परिणामों पर चर्चा की गई ।
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, दिल्ली से आए मुख्य वक्ता प्रो. संतोष भट्ट ने 'वमन कर्म' पर अपना शोधपरक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वमन न केवल बीमार व्यक्तियों के लिए, बल्कि स्वस्थ व्यक्तियों के लिए भी शोधन का बेहतरीन माध्यम है। खुशीलाल आयुर्वेद अस्पताल में सोरायसिस, एक्जिमा और श्वास रोगों (अस्थमा) का वमन क्रिया के माध्यम से सफल उपचार किया जा रहा है। यह प्रक्रिया शरीर से विषाक्त तत्वों को बाहर निकालती है, जिससे पुरानी त्वचा बीमारियों में स्थाई लाभ मिलता है।
द्वितीय सत्र में डॉ. पूनम सावरकर ने 'आयुर्वेदीय मसाज थैरेपी' की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ऑस्टियोआर्थराइटिस, स्पॉन्डिलाइटिस, फ्रोजन शोल्डर और कमर दर्द जैसे रोगों में आयुर्वेद की यह पद्धति आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों (एलोपैथी) से कहीं अधिक प्रभावी और सुरक्षित है। उनके अनुसार, यह थैरेपी बिना किसी दुष्प्रभाव के नसों और मांसपेशियों को पुनर्जीवित करती है।
हमारा उद्देश्य आयुर्वेद की पंचकर्म विधा को वैश्विक मानकों पर ले जाना है। इस कार्यशाला से हमारे छात्र और चिकित्सक नई तकनीकों से अवगत हो रहे हैं, जिसका सीधा लाभ मरीजों को मिलेगा। - डॉ. उमेश शुक्ला, प्रधानाचार्य
अस्पताल में हम असाध्य रोगों के लिए विशेष पंचकर्म यूनिट चला रहे हैं। वमन और विशेष मसाज पद्धतियों से हम उन मरीजों को भी ठीक कर रहे हैं जो लंबे समय से दर्द निवारक दवाओं पर निर्भर थे। - डॉ. हरि प्रकाश शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक
Updated on:
20 Feb 2026 07:27 pm
Published on:
20 Feb 2026 07:26 pm
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