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भोपाल में जमींदोज होंगे कॉलोनियों के दो हजार दुकान मकान

एमपी की राजधानी भोपाल के हजारों दुकान मकान ध्वस्त होंगे। यहां कलियासोत नदी के 33 मीटर के दायरे के सभी निर्माण टूटेंगे। इस संबंध में एनजीटी का आदेश जारी किया गया है जिसके लिए नगरीय विकास के प्रमुख सचिव से शपथ-पत्र भी लिया। दिसंबर तक ये कार्रवाई होगी जिसके अंतर्गत दायरे में बनी कॉलोनियों और दुकान मकान ढहाए जाएंगे।

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कलियासोत नदी के 33 मीटर के दायरे के सभी निर्माण टूटेंगे

भोपाल. एमपी की राजधानी भोपाल के हजारों दुकान मकान ध्वस्त होंगे। यहां कलियासोत नदी के 33 मीटर के दायरे के सभी निर्माण टूटेंगे। इस संबंध में एनजीटी का आदेश जारी किया गया है जिसके लिए नगरीय विकास के प्रमुख सचिव से शपथ-पत्र भी लिया। दिसंबर तक ये कार्रवाई होगी जिसके अंतर्गत दायरे में बनी कॉलोनियों और दुकान मकान ढहाए जाएंगे।

एनजीटी ने एक बार फिर राजधानी की कलियासोत नदी के किनारे से दोनों ओर 33 मीटर के दायरे में आने वाले सभी अतिक्रमण और अवैध निर्माणों को तोड़ने के आदेश दिए हैं। इस क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट और ओपन एरिया के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसके साथ नदी में सीवेज नहीं मिलने की व्यवस्था भी की जाएगी।

खास यह है कि ट्रिब्यूनल ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई से शपथ पत्र लिया है, उसके बाद आदेश जारी किया। इसके लिए आदेश को पांच दिन तक रोककर रखा गया। पीएस ने शपथपत्र में कहा है कि वे कलियासोत नदी के 33 मीटर दायरे के सभी अतिक्रमण और अवैध निर्माण को दो माह में सीमांकन कराकर चिह्नित कराएंगे और दिसंबर अंत तक इन्हें तोड़ने की कार्रवाई की जाएगी। एक अनुमान के अनुसार 33 मीटर दायरे में लगभग दो हजार निर्माण आएंगे। इनमें कुछ कॉलोनियों के मकान भी शामिल हैं।

एनजीटी सेंट्रल जोन के जस्टिस सुधीर अग्रवाल और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. अफरोज अहमद की बेंच ने डॉ सुभाष सी पांडे की याचिका पर यह अंतिम आदेश पारित किया है। 11 अगस्त को हुई सुनवाई में एनजीटी ने प्रमुख सचिव और नगर निगम कमिश्नर को तलब किया था। दोनों अधिकारियों से पूछा गया कि वर्ष 2014 में आदेश जारी होने के बाद उस पर अभी तक अमल क्यों नहीं हो पाया। इसका अधिकारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके थे। इसके बाद आगामी कार्रवाई के संबंध में शपथपत्र मांगा गया। उसके बाद आदेश जारी किया गया।

सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से यह बताया गया था कि कलियासोत नदी ने अपना रास्ता बदल दिया है इसलिए उसका किनारा ही तय नहीं हो पाया। इसे ट्रिब्यूनल ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि बेसाल्ट रॉक इलाके वाली नदियां कभी रास्ता नहीं बदलती हैं। इसके बाद पीएस ने एफिडेविट में कहा है कि वे राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कलियासोत के किनारों से ही 33 मीटर दायरे का सीमांकन कराएंगे।

कलियासोत नदी के संबंध में डॉ. सुभाष पांडे की याचिका पर सबसे पहले 20 अगस्त 2014 को एनजीटी ने 33 मीटर दायरे के निर्माण तोड़ने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद एक भी निर्माण नहीं तोड़ा गया। डॉ. पांडे ने इस संबंध में दोबारा याचिका लगाने के साथ इस ऑर्डर की एक्जीक्यूशन याचिका भी दायर की थी। इसके बाद 19 जुलाई 2021 को फिर आदेश जारी किया गया लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद अब तीसरी बार आदेश जारी हुआ है।

ये हैं प्रमुख बिंदु
● कलियासोत नदी के किनारे पर दोनों ओर 33 मीटर दायरे की पहचान और सीमांकन किया जाए। वहां पर चिह्न भी लगाए जाएं।
● इस दायरे में आने वाले सभी निर्माण तोड़े जाएं। इसमें किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं किया जाए। यह नो कंस्ट्रक्शन जोन रहेगा।
● नदी के दोनों ओर 33 मीटर दायरे में ग्रीन बेल्ट विकसित किया जाए।
● इस नदी का पानी प्रदूषित है इसलिए इसमें केवल ट्रीटेड पानी ही आए यह सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए आसपास की कॉलोनियों में पर्याप्त सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाएं।

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