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पता की उलाहना और उपहास ने लिया सामाजिक प्रताडऩा का रूप

भारत भवन में नाटक 'कथा एक कंस की' का मंचन  

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पता की उलाहना और उपहास ने लिया सामाजिक प्रताडऩा का रूप

भोपाल। कंस की मानवीय संवेदनाओं पर केंद्रित नाटक 'कथा एक कंस की' का मंचन भारत भवन के मंच पर हुआ। दया प्रकाश सिन्हा के लेखन के इस नाटक अरविंद सिंह के निर्देशन में किया गया। कंस को लोग निरंकुश शासक के रूप में जानते हैं लेकिन उसके कविरूप, संगीत प्रेम और कोमल हृदय से लोग अंजान हैं। कंस के इन्हीं पक्षों को जब दर्शकों के सामने नाट्य कलाकारों ने पेश किया तो दर्शकों ने खूब सराहा। नाटक में कलाकारों ने वीणा से लगाव रखने वाले कोमल बालक के क्रूर बनने की दास्तां को बयां किया।

कंस की क्रूरता दुनिया में इतनी मशहूर है कि लोग उसे राक्षस के नाम से जानते हैं जबकि कंस एक प्रेमी और कवि भी था लेकिन कंस के पिता ने उसको प्यार से दूर रखा। हमेशा उसका तिरस्कार किया। पिता की उलाहना और उपहास ने धीरे-धीरे उसके लिए सामाजिक प्रताडऩा का रूप ले लिया। कंस का विवाह भी राजनैतिक लाभ के तहत हुआ। वहीं वह निरंकुश शासन के लिए अपने परिजनों को भी कैद करवाता है। उसे प्रेमिका भी नहीं मिलती। उसे अपने नजदीकी लोगों ने धोखा दिया। इस वजह से कंस को खुद को बदलना पड़ा।

बचपन से क्रूर नहीं था कंस
नाटक के निर्देशक अरविंद सिंह ने बताया कि नाटक में हमने सिर्फ कंस के उस पहलू को दिखाने की कोशिश की है जिसे दुनिया ने नहीं देखा। हमने नाटक से बनाते की कोशिश की है कि कंस पैदाईशी क्रूर नहीं था वह तो अपने समाज और अपने पिता की वजह से भरता गया और एक दिन इतना भर गया कि वह क्रूर शासकों की श्रेणी में आ गया। नाटक के सबसे खास पहलू की बात की जाए तो नाटक में कंस का रोल महेंद्र मेवाती ने किया, जो मंगल पांडे, भाग मिल्खा भाग और चिंटू जी जैसी फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। इनके अलावा साहिल खान, अवधेश झा, हरलीन कौर, नेहा, रमा चौधरी, कार्तिक और चिराग में भी अभिनय किया।

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