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कुलपति और रजिस्ट्रार ने मनमाने ढंग से दी पुनर्मूल्यांकन की अनुमति लगी रोक

भोज विवि के वर्तमान रजिस्ट्रार ने आदेश को बताया गलत

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कुलपति और रजिस्ट्रार ने मनमाने ढंग से दी पुनर्मूल्यांकन की अनुमति लगी रोक

भोपाल. मध्य प्रदश्ेा भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ जयंत सोनवलकर और तत्कालीन रजिस्ट्रार अरुण चौहान ने कुछ खास लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए विवि अधिनियम और नियम कायदों को ताक पर रख दिया। दोनों ने मिलकर स्नात्कोत्तर पाठ्यक्रम में संचालित एलएलम उत्तराद्र्ध के पांच परीक्षार्थियों को परीक्षा परिणाम आने के छह माह बाद पुनर्मूल्यांकन करवाने के आदेश दे दिए। जबकि परीक्षा परिणाम आने के अधिकतम 30 दिन यानी एक माह तक ही पुनर्मूल्यांकन कराया जा सकता है। विवि के वर्तमान रजिस्ट्रार डॉ. एचएस त्रिपाठी ने आदेश को नियम विरुद्ध और मनमाना पाते हुए इस पर रोक लगा दी है।

जानकारी के अनुसार विवि ने 25 अक्टूबर 2018 को एलएलएम उत्तराद्र्ध का परीक्षा परिणाम जारी किया था। इसमें पांच परीक्षार्थी फेल हो गए थे। पुनर्मूल्यांकन कराने के लिए इन पांचों अभ्यर्थियों ने 07 मार्च 2019 को आवेदन दिया। जिस पर कुलपति डॉ. जयंत सोनवलकर ने तत्काल आदेश जारी कर दिए। कुलपति के निर्देश पर निदेशक प्रवेश एवं मूल्यांकन ने स्नातकोत्तर प्रभारी राजेश सक्सेना को तत्काल एमपी ऑनलाइन के माध्यम से आवेदन जमा करवाने के लिए निर्देशित कर दिया। आदेश पर कार्रवाई इतनी तेजी से हुई कि सक्सेना ने एमपी आनलाइन से लिंक ओपन कराकर आवेदन भी जमा कर दिए गए। बता दें पांच परीक्षार्थियों में एक परीक्षार्थी एडीपीपीओ ग्वालियर का अधिकारी है। आरोप है कि ये एक विचारधारा विशेष के समर्थक हैं। जिसका फायदा कुलपति डॉ. जयंत सोनवलकर और रजिस्ट्रार अरुण चौहान उठाना चाहते हैं। विश्वविद्यालय नियमानुसार परीक्षा परिणाम घोषित होने के एक महीने यानी 30 दिन में पुनर्मूल्यांकन, पुनर्गणना के आवेदन जमा करवाए जाते हैं।

विवि के चक्कर काट रहे ऐसे सैकड़ों आवेदक, बस अपने का पहुंचा रहे लाभ

भोज विवि कई सालों से ऑफ लाइन पुनर्मूल्यांकन, पुनर्गणना के आवेदन जमा करवाता था, लेकिन वर्ष 2017-18 की परीक्षा के बाद पुनर्मूल्यांकन, पुनर्गणना के आवेदन एमपी ऑनलाइन के माध्यम से जमा करवाए जाने लगे। जिसका फ ॉर्मेट अधूरा होने से सैकड़ो आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए। जिन्होंने ऑनलाइन की जानकारी न होने से ऑफ लाइन आवेदन कि ए थे उन्हें बिना किसी प्रविष्टि के लौटा दिया गया, जिनकी लगभग संख्या लगभग 800 से अधिक है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब इतनी बड़ी संख्या में आवेदन वापस किए गए तो फि र एलएलएम के 05 परीक्षार्थियों को क्यों विशेष अनुमति देकर मात्र 15 दिनों में आवेदन से लेकर रिजल्ट तक कि कार्रवाई कर दी गई।

एलएलएम के पांच छात्रों के पुनर्मूल्यांकन का जो आदेश जारी किया गया था वह नियमविुरुद्ध है। इस आदेश पर तत्काल रोक लगा दी गई है।
एचएस त्रिपाठी, कुलसचिव भोज विवि

मैं बाहर हूं। अभी मुझे ठीक जानकारी नहीं है। आपने बताया है मैं इसे देखकर ही कुछ बता पाऊंगा।
जयंत सोनवलकर, कुलपति, भोज विवि

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