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भगवान राम को आज खीर के साथ जरूर लगाएं ये 4 भोग, अर्पित करें कंदमूल फल

locationभोपालPublished: Jan 22, 2024 09:57:36 am

Submitted by:

Ashtha Awasthi

भोपाल। अयोध्या राम मंदिर में भगवान राम का अभिषेक 22 जनवरी को दोपहर अभिजीत मुहूर्त में होगा। मार्कंडेय मंदिर के पंडित रामनारायण आचार्य ने बताया कि राम ज्योति प्राण प्रतिष्ठा के समय नहीं, बल्कि राम ज्योति अंधेरा होने से पहले जलाएं। राम ज्योति जलाने के लिए सरसों के तेल का प्रयोग करना चाहिए। घी का दीपक भी बेहतर है। इस दिन कम से कम 1 दीया जलाना चाहिए और आप चाहें तो 108 दीपक तक जला सकते हैं। 11 दीपक जलाना बहुत अशुभ होगा, क्योंकि भगवान राम ने रावण के 10 सिरों को मारकर विजय हासिल की थी।

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ayodhya ram mandir

खीर बनाएं, पंचामृत और पंजीरी का भोग लगाएं

भगवान राम को खीर बहुत प्रिय है। जब भगवान राम और उनके चारों भाइयों का जन्म राजा दशरथ के यहां हुआ, तो खीर ही बनाई गई थी। जहां भगवान राम को खीर, केसर भात, लड्डू और बर्फी का भोग लगाया जाता है। इनकी पूजा में मुख्य रूप से भोग के लिए जिस प्रसाद को बनाया जाता है। वह हैं पंचामृत और धनिया की पंजीरी, इसे सोंठ की पंजीरी भी कहा जाता है। भगवान राम विष्णु के अवतार हैं, भगवान विष्णु के हर प्रसाद में तुलसी का पत्ता डालना चाहिए।

रामलाल को इन रंगों के पहनाएं वस्त्र

प्राण प्रतिष्ठा सोमवार को है, इस दिन रामलला सफेद वस्त्र धारण करेंगे। रामलला के वस्त्र का रंग दिन के अनुसार बदलता रहता है. रविवार को गुलाबी, सोमवार को सफेद, मंगलवार को लाल, बुधवार को हरा, गुरुवार को पीला, शुक्रवार को क्रीम कलर और शनिवार को नीले रंग के वस्त्र धारण करेंगे।

अर्पित करें ये फल

भगवान राम वनवास पर केवल कंदमूल का सेवन किया। ऐसे में आप उन्हें कंद मूल भी अर्पित कर सकते हैं। शबरी के जूठे बेर खाने का प्रसंग प्रचलित है। ऐसे में श्री राम को बेर भी चढ़ा सकते हैं।

घर में ऐसे करें पूजा अर्चना

पूजन के लिए दोपहर का श्रेष्ठ मुहूर्त है। ऐसे में अभिजीत मुहूर्त में पूजन करना श्रेष्ठ है। पं. रामनारायण आचार्य का कहना है कि भगवान राम का जन्म भी अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12 बजे हुआ हुआ है। सोमवार को अभिजीत 12:05 बजे से 12:58 तक रहेगा। इसमें 12:22 मिनट पर विशेष मुहूर्त रहेगा। ऐसे में घरों में षोषडोपचार विधि के साथ पूजा अर्चना करना विशेष फलदायी होगी। पूजन घर में भगवान के लिए आसन सजाए, इसके बाद चित्र, प्रतिमा आदि का स्वरूप रखकर भगवान का ध्यान करे। सबसे पहले भगवान के चरण धुलाए, उसके बाद स्नान, पंचामृत अभिषेक करे और वस्त्र, यज्ञोपवीत आदि धारण कराए। फिर पूजा कर हवन व आरती करें।

रामानंदी परंपरा से होगी पूजा

रामलला को सुबह जगाने से पूजन शुरू होता है। उन्हें शहद और चंदन का लेप लगाने, स्नान करवाने से लेकर वस्त्र पहनाया जाता है। रामानंदी परंपरा के अनुसार हर दिन और मौसम के हिसाब से अलग- अलग वस्त्र पहनाए जाते हैं।

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