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जिस भारत भवन में ईंटें ढोईं, वहीं सेल्फी मोमेंट में छलक उठीं पदमश्री भूरी बाई की आंखें

- भारत भवन 39वां स्थापना दिवस समारोह- पीएस ने कहा- ये समाज की रियल सेलिब्रिटी- संस्कृति विभाग का बनाया ब्रांड एंबेसेडर

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भोपाल. भारत भवन के 39वें स्थापना दिवस समारोह का आगाज शनिवार को हुआ। समारोह की मुख्य अतिथि भील चित्रकार पद्मश्री भूरी बाई थीं। भारत भवन के निर्माण के समय 1981-82 में भूरी बाई यहां मजदूरी करती थीं। संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला ने उन्हें संस्कृति विभाग का ब्रांड एंबेसेडर बनाने की घोषणा करते हुए कहा कि मैं आज इनके साथ सेल्फी लूंगा। ये मेरे लिए गर्व की बात है।

भूरी बाई की आंखें छलक उठीं

जैसे ही पीएस ने सेल्फी ली, भूरी बाई की आंखें छलक उठीं। ये देख पास खड़े पद्मश्री पिल तिवारी मुस्कुरा दिए। पीएस शुक्ला ने श्रोताओं से कहा कि भूरी बाई एमपी में कला और संस्कृति की समृद्ध परंपरा का प्रतिनिधित्व करने वाली रियल सिलेब्रिटी हैं। इनके साथ ज्यादा से ज्यादा लोगों को सेल्फी लेना चाहिए। ताकि सभी लोग इससे मोटिवेट हो सकें। इस मौके पर भूरी बाई वक्तव्य देते हुए भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि मैं झोपड़ी में रहती थी। अपने घर से झोले में रोटियां लेकर भारत भवन आती थी और यहां के पेड़ के नीचे बैठकर खाती थी। मैं स्वामीनाथन जी की शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने मुझे मजदूर से चित्रकार बना दिया। उन्होंने मेरी कला को समझा और मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि आज में यहां वही पारंपरिक ड्रेस पहनकर आई हूं, जो यहां मजदूरी करते हुए पहना करती थी।

सभी को मौका देना होगा
लोक कला मर्मज्ञ पद्मश्री डॉ. कपिल तिवारी ने कहा कि कोरोना जैसे डरावने माहौल में भी हम यहां जीवन का जश्न मना रहे हैं। मनुष्य का जीवन से अनुराग बहुत बड़ा होता है। मैंने जब संस्कृति विभाग में काम करना शुरू किया था तो न मुझमें कुछ समझ थी और न ही सीख। लेकिन लगातार काम करते हुए, सृजनकारों को सुनने, देखते और उनके साथ रहते हुए सब सीखा। हमें अपनी कंफर्ट जोन से बाहर निकलना होगा। कला अमीरी-गरीबी नहीं, प्रतिभा की मोहताज होती है। मुझे अतिथि होने में संकोच और प्रसन्नता दोनों हो रही है, क्योंकि मैं तो भारत भवन की यात्रा का सहभागी रहा हूं।