चूहों से निजात के लिए चलाया था अभियान, अब फिर लगे सताने
इंदौर। शहर में चूहों का आतंक कई वर्षों से है। चूहों से सबसे ज्यादा प्रभावित स्थानों में एमवाय अस्पताल का नाम सबसे ऊपर रहा है। करीब 29 साल से अस्पताल प्रबंधन की चूहों के खिलाफ लड़ाई जारी है। एक समय तत्कालीन कलेक्टर ने अस्पताल में चूहों के खिलाफ अभियान चलाते हुए पूरा अस्पताल ही खाली करवा दिया था। 8 वर्ष पहले भी चूहों का अस्पताल से सफाया करने के लिए टेंडर निकालकर एक कंपनी को जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि अस्पताल में अब फिर से चूहों ने नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है।
एमवायएच, कैंसर अस्पताल और चाचा नेहरू अस्पताल में चूहों को मारने की मुहिम के तहत नई ओपीडी बिल्डिंग और परिसर में चूहों के बिल में केमिकल युक्त खाद्य सामग्री का मिश्रण डाला गया था। इसके पहले वर्ष 1994 में जब एमवायएच में कायाकल्प अभियान चलाया गया था, तब बिल्डिंग में अंदर से बाहर की ओर पेस्ट कंट्रोल किया गया था।
नवजात शिशु के पैर कुतर गए थे
मई 2021 में एमवायएच की पहली मंजिल पर नवजात शिशु नर्सरी में भर्ती एक नवजात के पैर का अंगूठा और एड़ी को चूहों ने कुतर दिया था। इससे शिशु की जान खतरे में आ गई। परिजन ने इस पर खूब हंगामा भी किया था। शिशु प्री-मेच्योर था व वजन 1.4 किग्रा था। देखरेख के लिए उसे नर्सरी में वॉर्मर पर रखा गया था। जब बच्चे की मां उसे दूध पिलाने पहुंची तो मामले का खुलासा हुआ।
रोजाना खर्च किए लाखों रुपए
चूहे मारने वाली कंपनी ने रोज 1.80 लाख रुपए चूहों के जहरीले खाने पर खर्च किए थे। इसमें झींगा मछली, मावा, घी, धनिया पावडर और सेव जैसी खाद्य सामग्री का इस्तेमाल किया गया। कंपनी के 42 कर्मचारी दिन-रात इस काम में जुटे रहे। चूहों को रोजाना औसतन 12 क्विंटल खाना दिया गया था। एमवायएच परिसर में एक साथ पूरे 10 एकड़ क्षेत्र में चूहों को जहरीला खाना परोसा जाता था। चूहों के बिलों में जहरीली गैस छोड़ी गई, ताकि बिलों में छुपे चूहे भीतर ही मर जाएं।
2400 हजार चूहे मारे
वर्ष 2014 में एमवायएच कायाकल्प अभियान के तहत निजी कंपनी द्वारा चूहा मार अभियान के तहत किए गए पेस्ट कंट्रोल में करीब 8 दिन तक चूहे मारे गए। इस दौरान करीब 2400 चूहों को मारा गया। इनमें से कुछ चूहों को रामबाग मुक्तिधाम और कुछ को शवदाह गृह में जलाया गया।
पहले भी पत्रिका अखबार में छप चुकी हैं ये खबरें
10 हजार चूहों के बिल चिन्हित किए थे अस्पताल परिसर में।
35 कर्मचारियों की पांच टीमें लगी थी खात्मे में।
56 लाख में दिया था पेस्ट कंट्रोल का ठेका।
12 हजार चूहे एकसाथ जलाए गए थे 1994 के अभियान में।