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Raksha Bandhan 2019: भाई-बहन के पर्व रक्षा बंधन में राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

ये पर्व सिर्फ हिन्दू ही नहीं बल्कि सिख और जैन भी...

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भोपाल।रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) ऐसा पर्व है, जिसका इंतजार हर भाई-बहन को बेसब्री से होता है। इस बार ये पर्व खास योग लेकर आ रहा है।

रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन का पर्व है। बहन भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती है और उसके लंबे उम्र की कामना करती है। भाई अपनी बहन को वचन देता है कि वह ताउम्र उसकी रक्षा करेगा।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार हिंदू धर्म में रक्षा बंधन के त्योहार का बहुत ही अधिक महत्व है। इस पर्व को भाई-बहन का त्योहार माना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाईयों के कलाई में रक्षा सूत्र बांधती है। इसके साथ ही लंबी उम्र की कामना करती है। खास बात ये भी है कि ये पर्व सिर्फ हिन्दू ही नहीं बल्कि सिख और जैन भी जोरदार तरीके से मनाते हैं।

रक्षा बंधन किस दिन है?
इस बार राखी का यह पावन त्योहार 15 अगस्त, गुरुवार को मनाया जाएगा।

रक्षा बंधन : शुभ मुहूर्त RakshaBandhan muhurt
इस बार राखी बांधने का मुहूर्त बहुत ही लंबा है। रक्षा बंधन 2019 में बहने अपने भाई को सुबह 5 बजकर 49 मिनट से शाम 6 बजकर 1 मिनट तक राखी बांध सकती हैं।

ऐसे समझें रक्षा बंधन पांचांग : rakshabandhan panchang

रक्षा बंधन अनुष्ठान का समय- सुबह 05:53 से शाम 5:58
अपराह्न मुहूर्त- दोपहर 1:43 से
शाम 4:20
पूर्णिमा तिथि आरंभ – दोहपर 3:45 (14 अगस्त)
पूर्णिमा तिथि समाप्त- शाम 5:58 (15 अगस्त)
भद्रा समाप्त: सूर्योदय से पहले

रक्षाबंधन : पूजा विधि rakshabandhan puja vidhi
रक्षाबंधन के दिन अपने भाई को इस तरह राखी बांधें। सबसे पहले राखी की थाली सजाएं। इस थाली में रोली, कुमकुम, अक्षत, पीली सरसों के बीज, दीपक और राखी रखें। इसके बाद भाई को तिलक लगाकर उसके दाहिने हाथ में रक्षा सूत्र यानी कि राखी बांधें। राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारें। फिर भाई को मिठाई खिलाएं। अगर भाई आपसे बड़ा है तो चरण स्‍पर्श कर उसका आशीर्वाद लें।

अगर बहन बड़ी हो तो भाई को चरण स्‍पर्श करना चाहिए। राखी बांधने के बाद भाइयों को इच्‍छा और सामर्थ्‍य के अनुसार बहनों को भेंट देनी चाहिए। ब्राह्मण या पंडित जी भी अपने यजमान की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते हैं।
ऐसा वक्‍त इस मंत्र का उच्‍चारण करना चाहिए...

मंत्र :
ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

भाई राखी बंधवाते समय इस दिशा में अपना मुंह करें
राखी बंधवाते समय भाई अपना मुंह पश्चिम दिशा में करके बैठें। दरअसल सुबह 05:30 बजे चन्द्रमा कुंभ राशि में 3 डिग्री का होगा और ये सारे दिन उत्तर की तरफ बढ़ेगा।

इस स्थिति में अगर आप पश्चिम की ओर बैठेंगे तो सुबह सुबह चन्द्रमा आपके सामने होगा और बाकी दिन ये दाहिनी ओर जाता जायेगा। आपको बता दें कि सामने का और दाहिनी ओर का चन्द्रमा शुभ होता है। अतः राखी बंधवाते समय भाई अगर पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके बैठे तो अच्छा होगा।


अगस्त 2019 में ये हैं त्योहार : festivals of August 2019 -

अगस्त महीने की शुरुआत श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या के साथ हो रहा है। इस महीने के 15 दिन श्रावण के होंगे जबकि 15 दिन भाद्रपद के। इन दिनों कई बड़े व्रत त्योहार देश में मनाए जाते हैं जिनका धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक रूप से काफी महत्व है।

1- हरियाली अमावस (1 अगस्त, गुरुवार) HARIYALI AMAVAS: श्रावण मास की अमावस्या को
हरियाली अमावस्या के नाम से ही जाना चाहता है। सावन के महीने में बारिश होने के कारण प्रकृति का सौंदर्य अपने चरम पर होता है। इसलिए कहा जाता है कि इस दिन प्रकृति का महत्व समझते हुए हर किसी को पौधरोपण करना चाहिए।

2- हरियाली तीज (3 अगस्त, शनिवार) Hariyali teej : श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज व्रत धूमधाम से मनाया जाता है। सुहागन स्त्रियों के लिए इस व्रत का काफी महत्व है। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। हरियाली तीज के मौके पर नई नवेली दुल्हन के मायके से नए वस्त्र, सुहाग सामग्री, मेंहदी और मिठाई आने की परंपरा रही है। मधुश्रावणी व्रत बिहार के मिथिला का प्रमुख त्योहार है।


3- नाग पंचमी (5 अगस्त, सोमवार) nag panchami : सनातन धर्म में सांप को देवता के रूप में पूजा जाता है। इनका मूल निवास पाताल लोक माना जाता है। प्राचीनकाल से ही नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा की जाती रही है जिसका उल्लेख भविष्य पुराण में किया गया है। नागपंचमी का त्योहार श्रावण मास की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। भविष्य पुराण में कहा गया है कि नागपंचमी के दिन धान का लावा और दूध अर्पित करने से नागों की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

4- पवित्रा एकादशी (11 अगस्त, रविवार) Pavitra Ekadashi : सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा या पवित्रा एकादशी भी कहते हैं। जैसा कि इसके नाम से पता चलता है कि इस एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है। इस दिन पति और पत्नी जोड़े से व्रत रखते हैं और संतान प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु की पूजा करते हैं तो संतान प्राप्ति में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

5- रक्षाबंधन, श्रावण पूर्णिमा (15 अगस्त, गुरुवार ) rakshabandhan / Rakhi : भाई और बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व रक्षा बंधन हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा वाले दिन आयोजित किया जाता है। रक्षा सूत्र को बांधने के लिए ज्योतिषशास्त्र के अनुसार निर्धारित समय का अनुसरण किया जाता है। रक्षाबंधन केवल धागों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्यार, विश्वास और रिश्तों की गरिमा बनानेवाला पर्व है।

6- काज्जली तीज (18 अगस्त, रविवार) KAJALI TEEJ : काजली तीज भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इसे सातुड़ी या बड़ी तीज भी कहा जाता है इस दिन कन्याएं व सुहागन व्रत रखकर संध्या को नीमड़ी की पूजा करती हैं। कन्याएं सुंदर व सुशील वर तथा सुहागन पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। वे तीज माता की कथा सुनती हैं।

7- श्री गणेश (बहुला चतुर्थी) (19 अगस्त, सोमवार) Shri Ganesh : भाद्रपद के कृष्णपक्ष की चतुर्थी के दिन बहुला चतुर्थी का व्रत रखने का विधान है। इस व्रत को पुत्रवती महिलाएं रखती हैं। वे पूरा दिन व्रत रखने के बाद शाम को बछड़े वाली गाय की पूजा करती हैं और पूजन के बाद भोजन करती हैं। ऐसी मान्यता है कि सिद्धिविनायक का व्रत रखने से गणपति प्रसन्न हो जाते हैं और साधकों के सभी विघ्न दूर करते हैं।


8- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (23 शुक्रवार और 24 अगस्त शनिवार) Krishna Janmashtami 2019 : भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का यह त्योहार भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में सनातन धर्म को मानने वाले श्रद्धा के साथ मनाते हैं। इस दिन भगवान कृष्ण के भक्त व्रत रखते हैं और रात बारह बजे उनके जन्म के साथ ही विधि विधान से उनका पूजन कर व्रत समाप्त करते हैं। इस दिन कृष्णाष्टकम् आदि स्तोत्र का पाठ करते हुए भगवान कृष्ण का स्मरण करना चाहिए। रात्रि में ठीक 12 बजे उनके जन्म के बाद फिर से उनका विशेष पूजन और अर्चन करते हुए व्रत समाप्त कर लेना चाहिए।

9- अजा एकादशी (27 अगस्त, मंगलवार) aja ekadashi 2019 : एक साल में 24 एकादशियां होती हैं, लेकिन मलमास या अधिकमास होने की स्थिति में इनकी संख्या 26 हो जाती है। हिन्दू परंपरा में एकादशी को पुण्य कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है। ऐसा विश्वास है कि इस व्रत को करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। साथ ही इसी दिन से जैन धर्म का पर्युषण पर्व आरंभ होगा।