
नियमों का पेच ऐसा कि मप्र की गाडिय़ां हरियाणा-गुजरात में हो रहीं रजिस्टर्ड
भोपाल. गौतम नगर निवासी इरशाद अली ने हाल ही में ट्रक खरीदा। उन्हें पता चला कि आरटीओ में रजिस्ट्रेशन के लिए इस श्रेणी के ट्रक की कीमत अधिक है। मप्र में ट्रक पर लगने वाला टैक्स भी अन्य राज्यों के मुकाबले ज्यादा है। ऐसे में इरशाद ने ट्रक का रजिस्ट्रेशन हरियाणा से कराया। जिसका 57 हजार रुपए कम टैक्स जमा करना पड़ा। आरटीओ में रोजाना कमर्शियल वाहनों के रजिस्ट्रेशन टैक्स को लेकर विवाद की स्थिति बनती है। बड़ी गाडिय़ों के लाइफ टाइम टैक्स और नई के टैक्स में विसंगति के चलते अब ट्रांसपोर्टर्स दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं।
ट्रांसपोटर्स बताते हैं कि दूसरे राज्यों से रजिस्ट्रेशन कराने में टैक्स में 20 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपए तक का अंतर आता है। इसके कारण हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात के अलावा नागालैंड जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में भी ट्रक रजिस्टर्ड करवा रहे हैं। बताया जा रहा है कि आरटीओ के सॉफ्टवेयर में सभी गाडिय़ों के मॉडल के आधार पर कीमत दर्ज है। टैक्स की गणना इसी से होती है। खरीदार डीलर से मोलभाव और संबधों के आधार पर कीमत 50 हजार से 1.5 तक कम करवा लेते हैं, लेकिन सॉफ्टवेयर इसे नहीं मानता।
नियम नहीं इसलिए दूसरे राज्यों का रुख
परिवहन विभाग में ऐसा नियम नहीं है कि वाहन जहां से खरीदें, वहीं टैक्स जमा कर रजिस्ट्रेशन करवाएं। शहर में हर महीने 250 से ज्यादा बड़ी गाडिय़ां खरीदी जाती हैं। इनमें से 60 से 70 दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड होती हैं। इससे परिवहन विभाग को राजस्व का नुकसान हो रहा है।
महाराष्ट्र और हरियाणा में कम लगता है टैक्स
एक ट्रांसपोर्टर ने ट्रक खरीदा, जिसका लाइफ टाइम टैक्स भोपाल आरटीओ में 1.95 लाख रुपए बना। दूसरे ट्रांसपोर्टर ने महाराष्ट्र में गाड़ी की एमआरपी के बजाय खरीदी मूल्य पर टैक्स दिया, उन्हें टैक्स लगा 1.36 लाख। करीब 59 हजार रुपए का अंतर।
अन्य टैक्स भी ज्यादा
गुजरात में 6त्न लाइफ टाइम टैक्स है, मप्र में यह 7त्न है।
गुजरात में एक बार जीएसटी लगता है, जबकि यहां दो बार।
कई राज्यों में बिल के आधार पर टैक्स लगता है मप्र में सॉफ्टवेयर के आधार पर।
उत्तर-पूर्व राज्यों में त्रैमासिक टैक्स 3 हजार तो हमारे यहां 10 हजार रुपए से ज्यादा
कई राज्यों में त्रैमासिक टैक्स की सुविधा है, लेकिन मध्य प्रदेश में लाइफटाइम टैक्स से राशि ज्यादा हो जाती है।
&यह सही है कि ट्रांसपोर्टर बाहर जाकर गाडिय़ों का रजिस्टे्रशन कराते हैं, लेकिन इसमें कई बार टैक्स चोरी भी होती है।
डॉ. शैलेन्द्र श्रीवास्तव, आयुक्त, परिवहन विभाग
&दूसरे राज्यो में टैक्स यहां से आधे से भी कम है। फिटनेस, हाइपोकेशन, रोड टैक्स भी बहुत कम है। ऐसे में ऑपरेटर्स दूसरे राज्यों में गाडिय़ा रजिस्टर्ड करा लेते हैं।
विनोद जैन, अध्यक्ष, राजधानी ट्रक ऑपरेटर्स एसोसिएशन
&मप्र में रजिस्ट्रेशन महंगा है। यहां लाइफ टाइम टैक्स लगता है, जबकि अन्य राज्यों में त्रैमासिक।
अशोक मालपानी, अध्यक्ष, श्री भोपाल ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
Published on:
10 Mar 2019 04:04 am
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