
ग्वालियर चंबल संभाग से साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का है खास कनेक्शन,अब दिग्गी के खिलाफ मैदान में
भोपाल . देश की हॉट सीट बन चुकी भोपाल लोकसभा सीट पर चुनाव अब धार्मिक भानवाओं के इर्द-गिर्द सिमटता दिख रहा है. यहां दिग्विजय के सामने साध्वी प्रज्ञा के आने के बाद सारे समीकरण बदल गए हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्यो दो दिन पहले सियासी मैदान कदम रखीं साध्वी भोपाल में दिग्विजय के 'तगड़े नेटवर्क' को ध्वस्त कर पाएंगी?
सवाल इस लिए उठ रहा है कि दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश के 10 साल मुख्यमंत्री रह चुके हैं. सियासत का लंबा अनुभव है. सबसे बड़ी बात ये है कि साध्वी से लगभग 25 दिन पहले ही कांग्रेस ने उन्हें यहां से उम्मीदवार घोषित कर दिया था. चुनावी सियासत में इतने वक्त में कोई भी उम्मीदवार स्वभाविक रुप से बढ़त तो ले ही लेता है.
इधर. 30 साल भाजपा और संघ का गढ़ रही भोपाल सीट को पार्टी इतनी आसानी से हाथ से जाने देना नहीं चाहती. यही कारण है कि भाजपा ने अचानक साध्वी प्रज्ञा को दिग्विजय को सामने कर दिया और भोपाल का सियासी समीकरण ही बदल दिया. क्योंकि इतना तो तय है कि अब भोपाल में पूरा चुनाव धार्मिक भावनाओं के ईद-गिर्द ही रहेगा. क्योंकि टिकट का ऐलान होते ही साध्वी ने भी साफ कर दिया था कि यह चुनाव धर्मयुद्ध है. साध्वी के इस बयान से ही साफ हो गया था कि अब यहां स्थानीय मुद्दे हाशिये पर रहेंगे.
साथ ही साध्वी को चुनावी मैदान में उतारकर भाजपा ने पूरे प्रदेश का चुनावी समीकरण ही बदलने की कोशिश की है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि प्रदेश के सबसे बड़े सियासी दिग्गज दिग्विजय के दांव पर साध्वी पेंच लगा पाएंगी?
दिग्विजय की ताकत और कमजोरी
ताकत : दिग्विजय सिंह 10 साल तक प्रदेश के मुख्यमंत्री. प्रदेश में बड़ा सियासी नेटवर्क है, कार्यकर्ता और नेताओं का साथ है. साथ ही भाजपा नेताओं से भी बेहतर संबंध है. सियासत का लंबा अनुभव है, जो उनके पक्ष में जाता है.
कमजोरी : दिग्विजय की सबसे बडी कमजोरी हिन्दुत्व विरोध की रही है, जिसे साध्वी अपना हथियार बनाएंगी और चुनावी मैदान में भुनाने की कोशिश भी करेंगी. दिग्विजय सिंह की पार्टी के बड़े नेताओं से तालमेल सही नहीं है. साथ ही उन्हें भोपाल सीट से चुनाव लड़ने का भी अनुभव नहीं है.
साध्वी प्रज्ञा की ताकत और कमजोरी
ताकत : भोपाल सीट से चुनाव लड़ रही साध्वी प्रज्ञा की ताक कट्टर हिन्दुवादी छवि है. इसके साथ जेल व प्रताडऩा के मुद्दे पर इमोशनल पहलू भी उनके साथ है. इसके अलावा आक्रामक भाषण शैली है. सबसे बडी ताकत ये है कि उनके साथ आरएसएस का पूरे नेटवर्क है. जिसका उन्हें चुनाव में फायदा मिल सकता है.
कमजोरी : साध्वी प्रज्ञा की कमजोरी विवादित व कट्टर छवि है, जिस कारण उन्हें चुनाव में नुकसान हो सकता है. वहीं दिग्विजय के मुकाबले 25 दिन की देरी से नाम की घोषणा होना उनकी सियासी कमजोरी बन सकती है. दूसरा सबसे बड़ी कमजोरी है स्वास्थ्य, जिसके कारण क्षेत्र में दिग्विजय के मुकाबले उनकी सक्रियता में कमी आ सकती है.
Updated on:
19 Apr 2019 12:02 pm
Published on:
19 Apr 2019 12:01 pm
