
भोपाल। विश्व हिन्दू परिषद् (विहिप) का प्रांत संगठन प्रशिक्षण वर्ग इस बार मध्यभारत प्रांत के ह्रदय स्थल भोपाल में 1 से 7 अगस्त तक होने जा रहा है। इस आयोजन मेें पूरे देश से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की व्यवस्था वाले 12 क्षेत्र के 41 प्रांत के पदाधिकारी शामिल हो रहे हैं।
खास बात यह है कि कार्यक्रम में तीन दिन 2 से 4 अगस्त के बीच खुद संघ प्रमुख डॉ. मोहनराव भागवत की उपस्थिति रहेगी। इस दौरान भागवत प्रशिक्षण वर्ग में विभिन्न सत्र लेंगे तो उनके उद्बोधन भी होंगे। मालूम हो कि सरसंघचालक भागवत 21 दिवसीय विश्व संघ शिक्षा वर्ग के प्रकट कार्यक्रम यानी समापन समारोह में भी उपस्थित होंगे।
विहिप के 80 शीर्ष पदाधिकारी रहेंगे
राजधानी में एयरपोर्ट रोड स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विवि में प्रांत संगठन प्रशिक्षण वर्ग रखा गया है। इनमें प्रांत संगठन मंत्री, सह-संगठन मंत्री और क्षेत्र संगठन मंत्री समेत करीब 80 शीर्षस्थ पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य सुरेश भैयाजी जोशी आयोजन के संपर्क यानी पालक अधिकारी रहेंगे।
जनसंख्या नियंत्रण पर ये बोले थे स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत-
वहीं पिछले दिनों सामने आयी संयुक्त राष्ट्र संघ की सामने आई एक रिपोर्ट में अगले साल यानी 2023 तक भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बनने की बात सामने आने पर आरएसएस यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने जनसंख्या नियंत्रण पर अपनी राय दी-
इस दौरान आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने जनसंख्या नियंत्रण पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि, सिर्फ खाना और जनसंख्या बढ़ाने का काम तो जानवर भी करते हैं, सिर्फ जिंदा रहना ही जिंदगी का उदेश्य नहीं होना चाहिए, मनुष्य के कई कर्तव्य भी होते हैं। पिछले दिनों एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा था कि मनुष्य के पास अगर बुद्धि नहीं होती तो वो पृथ्वी पर सबसे कमजोर प्राणी होता, लेकिन कभी संज्ञानात्मक आवेग मनुष्य के जीवन में आया जिसने उसे सर्वश्रेष्ठ बनाया, मगर केवल खाना-पीना और प्रजा बढ़ाना, ये काम तो पशु भी करते हैं।
उन्होंने कहा कि, जो ताकतवर है वो जीवन जी लेगा, यह जंगल का कानून है लेकिन मनुष्यों की व्याख्या है कि सबसे योग्य व्यक्ति दूसरों को जीने में मदद करेगा। यह बातें आरएसएस चीफ भागवत ने कर्नाटक के चिकबल्लापुरा जिले के मुद्देनहल्ली में सत्य साईं ग्राम स्थित ‘श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी फॉर ह्यूमन एक्सीलेंस’ के पहले दीक्षांत समारोह में कही थी।
यहां अपने वक्त्वय में भागवत ने यह भी कहा कि, अगर किसी ने 10-12 साल पहले कहा होता कि भारत आगे बढ़ेगा तो हम इसे गंभीरता से नहीं लेते। राष्ट्र की प्रक्रिया तत्काल शुरू नहीं हुई, यह 1857 से है, जिसे स्वामी विवेकानंद द्वारा आगे बढ़ाया गया। संघ प्रमुख ने यहां कहा कि आध्यात्मिक साधनों के जरिये उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकती है क्योंकि विज्ञान अभी तक सृष्टि के स्रोत को नहीं समझ पाया है।
Published on:
29 Jul 2022 03:42 pm

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