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इस बार बन सकती है त्रिशंकु सरकार, भाजपा-कांग्रेस खेमे में मची खलबली

इस बार बन सकती है त्रिशंकु सरकार, भाजपा-कांग्रेस खेमे में मची खलबली...

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Tension in MP Politics

इस बार बन सकती है त्रिशंकु सरकार, भाजपा-कांग्रेस खेमे में मची खलबली

भोपाल। इस वर्ष 2018 में होने वाले चुनाव कई मामलों में खास रह सकते हैं। समाने आ रहे समीकरणों को देखते हुए इस बार मध्यप्रदेश में चुनाव त्रिकोणीय होने का अंदेशा बढ़ता जा रहा है।


दरअसल इस वर्ष होने वाले चुनावों में सपाक्स व जयस भी विधानसभा चुनाव में उतरने का मन बना चुकेे हैं। ऐसे में इन दोनों की तैयारियों ने भाजपा और कांग्रेस के कई नेताओं की नींद उड़ा दी है। बताया जाता है कि चिंता में वो नेता ज्यादा हैं जो आदिवासी सीटों पर लंबे समय से काबिज हैं या सपाक्स के भरोसे लंबे समय से चुनाव जीतते आ रहे हैं।

इन दोनों यानि सपाक्स व जयस के खुलकर चुनावों में आने से इन नेताओं को अब अपनी हार का डर सताने लगा है। वहीं सूत्रों के अनुसार कुछ भाजपा और कांग्रेस के नेता अब इन संगठनों को मनाने में जुट गए हैं।


सपाक्स की रणनीति...
सामान्य, पिछड़ा, अल्पसंख्यक वर्ग समाज संस्था (सपाक्स) ने राज्य में नवम्बर 2018 में होने वाले चुनाव में प्रदेश की सभी 230 सीटों पर प्रत्याशी उतरेगा। इसके लिए रणनीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

जयस की रणनीति...
प्रदेश के आदिवासी तबके के बीच काम कर रहे जय आदिवासी संगठन यानी जयस विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने जा रहा है। यह संगठन विधानसभा चुनाव में 47 आदिवासी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगा साथ ही 35 एेसी सीटें जहां पर आदिवासियों की संख्या 50 हजार तक है उन पर भी प्रत्याशी खड़े करने की तैयारी कर रहा है।

17 जून को सपाक्स के लिए महत्वपूर्ण...
जानकारी के मुताबिक 17 जून को भोपाल में नर्मदा मंदिर में सपाक्स समाज का बड़ा सम्मेलन होने वाला है। इस दौरान संस्था के संरक्षक हीरालाल त्रिवेदी (सेवानिवृत आईएएस) और लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष रघु ठाकुर के बीच विधानसभा चुनाव को लेकर निर्णायक बातचीत होगी। संभावना है कि सपाक्स- लोसपा के चुनाव चिन्ह पर चुनाव मैदान में उतरेगा। माना जा रहा है कि लोसपा के पहले से पंजीकृत राजनीतिक पार्टी होने के नाते इस रणनीति से सपाक्स के प्रत्याशियों को एक जैसा चुनाव चिन्ह मिल सकेगा।

सूत्रों के अनुसार सपाक्स ने 230 विधानसभा सीटों से प्रत्याशी उतारने की रणनीति बना ली है और संस्था का छह बिंदुओं पर लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी से समझौता तय माना जा रहा है। जिसकी विधिवत घोषणा 17 जून को नर्मदा मंदिर भोपाल में हो सकती है।


यह भी कहा जा रहा है कि सपाक्स से जुड़े अधिकारी,कर्मचारी पर्दे के पीछे रहकर इस राजनैतिक पहल को समर्थन दे रहे हैं। वहीं सामने आ रही सूचना के मुताबिक सपाक्स के संरक्षक राजीव शर्मा(आईएएस) ने संगठन की राजनैतिक गतिविधि पर टिप्पणी से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि उनकी जिम्मेदारी अधिकारियों,कर्मचारियों के हितों का संरक्षण करने तक है।

जानिये जयस की तैयारी...
सपाक्स के अलावा प्रदेश के एक और संगठन जयस भी विधानसभा चुनावों में उतरने की तैयारियों में जुटा हुआ है। सूत्रों के अनुसार प्रदेश के आदिवासी तबके के बीच काम कर रहे जय आदिवासी संगठन यानी जयस विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने जा रहा है ।

जयस की इस तैयारी ने कई ऐसे नेताओं की नींद उड़ा दी है, जो आदिवासी सीटों पर लंबे समय से काबिज हैं। इन नेताओं को अब अपनी हार का डर सताने लगा है। ऐसे में कई नेता अब इस संगठन को मनाने में जुट गए हैं। जयस पिछले छह सालों से आदिवासी युवाओं के बीच काम कर रहा है।

यहां है जयस का खास प्रभाव...
आदिवासियों की मांगों को लेकर उनको संगठित किया जा रहा है, जिनमें पांचवी अनूसूची समेत कई अन्य मांगें शामिल हैं। जयस का प्रभाव मालवा-निमाड़ में सबसे ज्यादा है इसके अलावा झाबुआ- मंडला जैसे आदिवासी जिलों में भी जयस काम कर रहा है।

जयस का कहना है कि वो विधानसभा चुनाव में 47 आदिवासी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगा। इसके साथ ही 35 एेसी सीटें जहां पर आदिवासियों की संख्या 50 हजार तक है उन पर भी प्रत्याशी खड़े करने की तैयारी की जा रही है।

हाल ही में मनावर,धार और कुक्षी में हुई जयस की रैली में जुटी भीड़ आदिवासी नेताओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

सीएम से मिलवाए जयस के नेता...
रंजना बघेल मनावर सीट से लंबे समय से चुनाव जीत रही हैं, इसलिए चिंता में वो भी हैं। रंजना बघेल ने हाल ही में कुछ लोगों को सीएम से मिलवाया था जिनको जयस का सदस्य बताया गया। रंजना ने कहा कि जयस के दो गुट काम करते हैं जिनमें से एक गुट समाज सेवा करता है, उन्हीं लोगों को सीएम से मिलवाया गया था।

इस मुलाकात के पीछे ये माना जा रहा है कि रंजना ने ये बताने की कोशिश की है कि जयस के लोग उनके साथ हैं जबकि जयस का कहना है कि उन लोगों का संगठन से कोई ताल्लुक नहीं हैं, उनको बहुत पहले निष्कासित किया जा चुका है।

- कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बाला बच्चन जयस को कांग्रेस के साथ लाने में जुटे हैं। बाला बच्चन का दावा है कि जयस के अध्यक्ष डॉ. हीरा अलावा से बात हो चुकी है, उनके लोग कांग्रेस के खिलाफ चुनाव नहीं लडेंगे। जयस से जुड़े युवा उनके ही साथी हैं इसलिए वो कांग्रेस का साथ देंगे।

जयस 47 आदिवासी सीटों के साथ साथ अन्य आदिवासी बाहुल्य सीटों पर भी चुनाव लड़ेगा, न वो कांग्रेस के साथ है और न भाजपा के। आदिवासियों को सिर्फ वोट बैंक समझा गया है। रंजना बघेल ने जिन लोगों को सीएम से मिलवाया है वो उनके संगठन से संबंधित नहीं हैं।
- डॉ हीरा अलावा राष्ट्रीय अध्यक्ष, जयस

जानिये क्या पड़ेगा असर!...
राजनीति के जानकारों का मानना है कि अभी जो हालात सामने हैं उन्हें देखकर तो यहीं लगता है कि इस बार मध्यप्रदेश का चुनाव बहुत खास होगा। और ये मुकाबला त्रिकोणीय रहेगा। राजनीति के जानकार ओर वर्षों तक ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर चुके एसके गौड का कहना है कि जयस का सबसे ज्यादा असर उन प्रत्याशियों पर होगा जो आदिवासी सीटों पर लंबे समय से काबिज हैंं वहीं सपाक्स का अधिकांश जगह देखने को मिलेगा।
उनका कहना है इन दोनों के सामने आने से कांग्रेस व भाजपा दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। वहीं इसके चलते प्रदेश में सरकार के समीकरण एकाएक बदल जाएंगे।