
Sports events based on sports fees in schools
बैतूल। शिक्षा विभाग ने वर्ष 2023-24 में शालेय स्तरीय खेल कूद स्पर्धाओं के आयोजन के लिए खेल कैलेंडर तो जारी कर दिया है, लेकिन खेल स्पर्धाओं के लिए बजट की व्यवस्था आज भी शालेय स्तर से होती है। शासन द्वारा खेल स्पर्धाओं के लिए अलग से कोई बजट नहीं दिया जाता है। छात्रों द्वारा दिए जाने वाले क्रीड़ा शुल्क की राशि से ही खेल स्पर्धाएं संपन्न कराई जाती है। यहीं कारण है कि स्कूलों में होने वाली ज्यादातर खेल स्पर्धाएं महज औपचारिकता पूर्ण करने के उद्देश्य से संपन्न कराई जाती है। जिसकी वजह से नेशनल स्पर्धाओं में प्रतिनिधित्व करने वाले छात्रों की संख्या भी कम होते जा रही है।
स्कूलों में वसूला जाता है क्रीड़ा शुल्क
सरकारी स्कूलों में भले ही खेलकूद की कोई सुविधा या संसाधन ना हो लेकिन इसके बाद भी प्रत्येक छात्रों से क्रीड़ा शुल्क वसूल किया जाता है। यह क्रीड़ा शुल्क अनुदान राशि के रूप में छात्रों से लिया जाता है। जिसमें हाईस्कूल 9वीं एवं 10वीं में 120 रुपए प्रति वर्ष, हायर सेकंडरी 11वीं एवं12वीं में 200 रुपए प्रति वर्ष वसूल किया जाता है। जबकि प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं से क्रीड़ा शुल्क नहीं वसूल किया जाता है। इसकी पूूर्ति हाईस्कूल एवं हायर सेकंडरी स्कूलों से की जाती है। छात्रों से क्रीड़ा शुल्क के रूप में ली जाने वाली यह राशि चार हिस्सों में बांटी जाती है। जिसमें शाला स्तर पर 40 प्रतिशत, जिला स्तर पर 35 प्रतिशत, संभाग स्तर पर 15 प्रतिशत और डीपीआई स्तर पर10 प्रतिशत शुल्क खर्च किया जाता है।
शिक्षा विभाग के पास महज 13 पीटीआई
जिले में शिक्षा विभाग के हाईस्कूल एवं हायर सेकंडरी स्कूलों की कुल संख्या 284 के लगभग बताई जाती है। खेलकूद स्पर्धाओं के लिए प्रत्येक स्कूलों में पीटीआई की भर्ती होना अनिवार्य हैं, लेकिन स्थिति यह है कि जिले में महज 13 पीटीआई ही पदस्थ है। इनमें 8 पीटीआई बैतूल ब्लॉक में, 4 पीटीआई मुलताई में और 1 पीटीआई आमला के मोरखा स्कूल में पदस्थ है। बताया गया कि लंबे समय से शासन स्तर से स्कूलों में पीटीआई की भर्ती नहीं की गई है। जिसके कारण प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों की यही स्थिति बनी हुई है।
आधी स्पर्धाओं में ले पाते हैं हिस्सा
शिक्षा विभाग के खेल कैलेंडर के अनुसार साल भर में कुल 40 अलग-अलग खेल स्पर्धाओं का आयोजन कराया जाता है। इनमें कई स्पर्धाएं तो ऐसी है जिनका नाम तक जिले के छात्रों को पता नहीं है। यहीं कारण है कि 40 में से आधी स्पर्धाओं में ही जिले के खिलाड़ी हिस्सा ले पाते हैं। हालांकि सभी स्पर्धाएं बैतूल में आयोजित की जाती है, लेकिन अनुभवी प्रशिक्षकों का अभाव होने के कारण खिलाड़ी जिला, राज्य एवं नेशनल स्तर तक प्रतिनिधित्व नहीं कर पाते हैं। स्पर्धा का आयोजन सिर्फ खेलकूद तक ही सिमट कर रह जाता है।
खेलों के लिए अलग से होना चाहिए बजट
स्कूलों में कराई जाने वाली खेल स्पर्धाओं के लिए आज भी क्रीड़ा शुल्क के बजट का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन यह बजट ऊंट के मुंह में जीरे के सामान है। खेल प्रशिक्षकों का मानना है कि यदि हमें स्कूलों से बेहतर खिलाड़ी चाहिए तो शासन को स्कूलों के खेल स्पर्धाओं के लिए अलग से बजट की व्यवस्था करना चाहिए, ताकि हम खिलाडिय़ों को बेहतर संसाधन एवं सुविधाएं मुहैया करा सके। क्रीड़ा शुल्क के भरोसे आयोजन कराना महज खेलकूद स्पर्धाओं की खानापूर्ति कराने जैसा है, जिससे हमें बेहतर खिलाड़ी हासिल नहीं हो सके हैं।
इनका कहना
- शालेय स्पर्धाओं के लिए शासन की ओर से अलग से कोई बजट नहीं दिया जाता है। क्रीड़ा शुल्क की राशि से ही साल भर स्कूलों में खेलकूद गतिविधियों का आयोजन कराया जाता है। चूंकि बजट नहीं है इसलिए सीमित संसाधनों में ही स्पर्धाएं करना पड़ती है।
- धर्मेंद्र पंवार, जिला क्रीड़ा अधिकारी बैतूल।
Published on:
28 Aug 2023 09:04 pm

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