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एक माह तक कलरीपायट्टु सीख नृत्य के साथ दिखाई सत्ता में हिंसा की कहानी

रवीन्द्र भवन में नाटक 'माटी गाड़ी' का मंचन

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भोपाल। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित टैगोर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों ने रवीन्द्र भवन में नाटक 'माटी गाड़ी' का मंचन किया गया। इसका निर्देशन संजय उपाध्याय ने किया। यह नाटक शूद्रक रचित मृच्छकटिकम् की पुनर्रचना है, जिसका भोजपुरी में रूपांतरण हृषिकेष सुलभ का है। संजय के निर्देशन में विद्यार्थी पिछले एक माह से इसकी तैयारी कर रहे थे। इसकी कोरियोग्राफी लता मुंशी ने की है। नाटक के लिए विद्यार्थियों ने सुजीत कलामंडलम से कलरीपायट्टु युद्धाभ्यास सीखा।

ध्वस्त हो जाती है न्याय व्यवस्था
यह नाटक सत्ता की हिंसा और क्रूरता की पोल खोलता है। साथ ही सत्ता के आस-पास बनने वाले असंवैधानिक सत्ता के केन्द्रों की लम्पटता और नृशंसता को अभिव्यक्त करता है। असंवैधानिक शक्तियों के दबाव में ध्वस्त हुईं न्याय व्यवस्था का चित्र खींचता यह नाटक तत्कालीन समाज में बौद्ध धर्म और सनातन धर्म के बीच चलने वाले संघर्षाे के माध्यम से धर्मसत्ता के आपसी द्वन्द को भी उजागर करता है। नाटक में राजा का ***** शकार इस नाटक में असंवैधानिक सत्ता की हिंसा और अराजकता का प्रतीक है, तो दूसरी ओर गणिका वसंतसेना और निर्धन चारूदत्त का संबंध प्रेम की पवित्रता और उदारता को प्रकट करता है।

लोक यात्रा पर लेकर जाता है नाटक
डायरेक्टर संजय उपाध्याय ने बताया कि माटीगाड़ी मुझे इसलिये प्रिय है क्योंकि यह लोकभाषा और नाट्य की परम्पराशील युक्तियों को क्लासिक गरिमा देता है। साथ ही शास्त्र को लोक की यात्रा पर साथ लेकर निकलता है। मृच्छकटिकम् संस्कृत रंगमंच की महान उपलब्धि है। हृषिकेश सुलभ द्वारा फिर से रचे जाने के बाद इस नाट्य रचना में कई नए उपपाठ और संवेदना की नई परतें शामिल होती है।

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