
बाघिन के शावक अब बड़े हो गए हैं। जंगल में शिकार के पीछे दौड़ते है।
भोपाल. बाघिन के चारों शावक अब डेढ़ साल के हो चुके हैं, जंगल का नियम कहता है कि 18 माह होने के मां अपने शावकों को जंगल में छोड़ देती है। वे खुद अपना शिकार कर पेट भरते हैं। हाल ही में वन विभाग की तरफ से लगाए गए ट्रैप कैमरों पर बाघिन के ये शावक कैद हुए हैं। जिसमें ये शिकार के पीछे दौड़ रहे हैं। वन विभाग के अफसरों की मानें तो ये तीन माह बाद पूरी तरह से खुद शिकार करने लगेंगे। ऐसे में इनकी सुरक्षा को लेकर वन विभाग अलर्ट पर है। इनके साथ ही कुछ समय पूर्व मैनिट में घुसा बाघ टी-1234 भी इसी रेंज में नजर आया है। ये बाघ भी इन चार शावकों का बड़ा भाई है। कुल मिलाकर 22 बाघ इस रेंज में घूम रहे हैं। इनकी सुरक्षा को लेकर वन विभाग अलर्ट पर है। 18 ट्रैप कैमरे, पैदल अमला और गाडि़यों पर 50 से जवान बाघों की सुरक्षा में लगे हैं।
इस पट्टी पर रहता है बाघों का आवागमन
खिरनी की ओर बाघ कॉरीडोर बना है यहां से समसगढ़, कठौतिया, चंदनपुरा, मेंडोरा-मेंडोरी, कलियासोत डैम, समरधा रेंज तक बाघ की पट्टी है। लेकिन कुछ समय से इस पट्टी पर मानवीय अतिक्रमण बढ़ा है। इससे बाघों की सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ा है। एक्सपर्ट की मानें तो इस पट्टी को बचाना बाघों की सुरक्षा के लिए अब जरूरी हो गया है। ये छोटे शावक भी आगे चलकर इस पट्टी की तरफ बढ़ सकते हैं, ऐसे में इनकी सुरक्षा और पुख्ता की गई है। इसके अलावा इस रेंज में जितने भी बाघ हैं, वे भी इसी पट्टी से देश की अन्य रेंज में जाते हैं, उस पर निगरानी बढाई गई है।
शहर में आस-पास, वाल्मी के पास टीमों का तैनाती
अक्सर बाघ शहर में कलियासोत की तरफ, वाल्मी, 13 शटर के आस-पास दिखाई देता है। ऐसे में वन विभाग का अमला यहां भी पेट्रोलिंग कर रहा है। रात में वाहनों की गश्त और दिन में पैदल गश्त की जा रही है। बाघिन के अलग होने के बाद कुछ समय तक इनकी सुरक्षा वन अमले के लिए चुनौती है।
वर्जन
बाघों की सुरक्षा को लेकर वन अमला अलर्ट पर है, 18 ट्रैप कैमरों और पैदल सहित वाहनों पर अमला निगरानी कर रहा है। शहर के क्षेत्रों में जहां बाघ दिखाई देते हैं वहां और जंगलों में टीमें पेट्रोलिंग कर रही हैं। शावक अब बड़े हो गए हैं, ट्रैप कैमरों में कैद हुुए हैं।
आलाेक पाठक, डीएफओ
Published on:
30 Jan 2024 10:56 pm
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