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बीमा अस्पताल में डिस्पेंसरी जैसी भी सुविधाएं नहीं

अपना काम छोड़कर यहां इलाज कराने आने वाले मरीज हो रहे परेशान

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बीमा अस्पताल में डिस्पेंसरी जैसी भी सुविधाएं नहीं

भेापाल/भेल. सोनागिरी स्थित राज्य बीमा अस्पताल की दशा इतनी खराब है कि यहां डिस्पेंसरी जितनी मूलभूत सुविधाएं भी मरीजों को नहीं मिलती। अस्पताल के भवन में मौजूद आधा से अधिक कक्षों में ताला लगा है। महत्वपूर्ण विभाग के ब्लॉक जैसे ऑपरेशन थिएटर, दवाई काउंटर, वेटिंग रूम आदि में सन्नाटा पसरा हुआ है। भवन के अगले हिस्से के कुछ कमरों में अस्पताल के कर्मचारी व डॉक्टर बैठते हैं, जहां दिनभर में गिनती के मरीज इलाज कराने आते हैं।
चूंकि सुविधाओं के अभाव में इस अस्पताल में मरीज आने से कतराते हैं। यदि किसी मरीज को गंभीर स्थिति में भर्ती कराया जाता है, तो दूसरे अस्पताल में बेहतर इलाज के लिए रेफर करना पड़ता है। बता दें कि कुछ दिनों पहले श्रम मंत्री महेन्द्र सिंह सिसोदिया इस अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे थे।

निरीक्षण के दौरान उन्हें अस्पताल में कई खामियां मिली थीं। इस पर मंत्री ने एक्सरे, सोनोग्राफी सहित भवन का रिनोवेशन करने का निर्देश दिए थे। निरीक्षण के दौरान अस्पतल परिसर में शराब की बोतल मिलने पर एक कर्मचारी को सस्पेंड करने के साथ ही सीएमएचओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

एक्सरे-सोनोग्राफी, दवा काउंटर सालों से बंद
भेल, गोविंदपुरा सहित मंडीदीप व शहर के आसपास इलाकों में स्थापित कारखानों में काम करने वाले करीब 60000 ठेका श्रमिकों के इलाज का जिम्मा अस्पताल पर है। सालों से एक्सरे, सोनोग्राफी, दवा काउंटर, सहित महत्वपूर्ण विभाग बंद है। कारण, जांचों के लिए?मशीन व इलाज के िलए डॉक्टर व स्टॉफ की कमी है। ऐसे में ज्यादातर विभागों पर ताला जड़ा हुआ है।

अस्पताल में बाउंड्रीवाल और गेट तक नहीं
अस्पताल भवन में गेट व बाउंड्रीवाल तक नहीं है। पार्किंग का शेड खराब हो चुका है, अस्पताल आने वाले मरीज व परिजनों को रात में वाहन चोरी होने का डर बना रहता है। अस्पताल का भवन में रिनोवेशन का कार्य किया जा रहा है।

कमेटी में बाहर का व्यक्ति
ठेका श्रमिक अध्यक्ष मनोज ने बताया कि अस्पताल की कमेटी में बाहर के व्यक्तियों को शामिल किया गया है। इस कारण सालों से अस्पताल की दशा खराब है। यहां इलाज कराने वाले मजदूर को इस कमेटी से बाहर रखा जाता है। सरकार मेडिकल सुविधाओं के नाम पर प्रति माह 1.75 पैसे वेतन से काटती है। फंड की कमी होने का सवाल ही नहीं है।

अस्पताल पर एक नजर
अस्पताल में बेडों की संख्या-100
ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या- 250 से 300
अस्पताल पर कितने श्रमिकों के इलाज का भार - करीब 60000
ईएसआई के नाम पर हर माह वेतन से काटे जाते हैं पैसे
अस्पताल गए मरीजों के बैठने की व्यवस्था नहीं
सालों से जांच सुविधाएं बंद

सहायक डॉक्टरों के भरोसे ओपीडी
खास बात यह है कि अस्पताल में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी सालों से बनी हुई है। सर्जिकल, आर्थोपेडिक, गायनिक, ईएनटी में डॉक्टर नहीं हैं। ओपीडी सहायक डॉक्टरों के भरोसे है, फिर भी भर्ती की प्रक्रिया पर जिम्मेदारों ने सालों से कार्रवाई नहीं की।

सवाल: अस्पताल परिसर में मंत्री को शराब की बोतल मिली
उत्तर: अस्पताल निरीक्षण के दौरान मंत्री ने यहां मिलने वाली सुविधाओं व कमियों को देखा। अस्पताल मैनेजमेंट ने डाक्टरों व स्टॉफ की कमी सहित अन्य बिन्दुओं को अवगत कराया गया। हां, इसी बीच अस्पताल परिसर में शराब की बोतल मिली। जिस पर कर्मचारी को सस्पेंड किया गया और मुझे कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
अस्पताल में बोतल कहां से आई : कर्मचारी सहित बिल्डिंग रेनोवेशन कार्य में लगे मजदूर में से किसी एक ने हरकत की है। इस पर अस्पताल मैनेजमेंट जांच करा रहा है।

श्रम मंत्री ने अस्पताल की दशा सुधारने क्या निर्देश दिए हं : अस्पताल में बंद सोनोग्राफी, एक्सरे मशीन सहित दूसरी जांचें शुरू करने के निर्देश दिए हैं। वहीं बाउंड्रीवाल, गेट व बिल्डिंग रिनोवेशन कार्य में तेजी लाने का निर्देश है।
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