
भोपाल। जी हां, एक तरफ जहां देश में स्वच्छता अभियान के लिए लोगों को जागरुक करने की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी ओर एक राजधानी में ही महिलाएं टॉयलेट यूज करने से बच रही हैं। इसका कारण भी थोड़ा अजीब ही है। हाल ही में यूएन वुमन संस्था की ओर से मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक सर्वे कराया गया है, जिसमें सामने आया है कि महिलाएं राजधानी में पब्लिक टॉयलेट यूज करने से डरती हैं। इस संस्था ने हाल ही में भोपाल, अजमेर , भुवनेश्वर और आंध्रप्रदेश के अनंतपुर के मार्केट्स में ये सर्वे किया था।
यूएन वुमन संस्था की रिपोर्ट में सामने आया है कि भोपाल के सबसे भीड़भाड़ वाले मार्केट्स में पब्लिक टॉयलेट यूज करने वालीं 58 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि वे ऐसे टॉयलेट यूज करने से बचती हैं। दरअसल इन टॉयलेट्स में एक ही एंट्रेंस गेट होता है, जहां पर पुरुष मौजूद होते हैं। इस वजह से उन्हें टॉयलेट यूज करने में झिझक होती है। इतना ही नहीं यहां पर सुरक्षाकर्मी भी पुरुष ही हैं। ऐसी स्थिति में महिलाओं के पास यहां नहीं जाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचता।
इस रिपोर्ट में महिलाओं की सुविधा के लिए कुछ सुझाव भी दिए गए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पब्लिक टॉयलेट्स में महिला कर्मचारियों की तैनाती होनी चाहिए। इसके अलावा मॉनिटरिंग भी बहुत जरुरी है साथ ही फीडबैक रजिस्टर भी यहां पर होना चाहिए। टॉयलेट्स में एयर फ्रेशनर सहित सफाई का ध्यान रखा जाए। इसके अलावा पब्लिक टॉयलेट का संचालन महिला समूहों को दिया जा सकता है।
इस सर्वे में 3 चौथाई कामकाजी महिलाओं ने बताया कि 12 से 15 घंटे तक घर से बाहर रहने के कारण वे पब्लिक टॉयलेट पर ज्यादा निर्भरता है। इस स्थिति में उन्हें मजबूरी में पब्लिक टॉयलेट इस्तेमाल करना पड़ता है। इतना ही नहीं लगभग 34 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि टॉयलेट पहुंच के बाहर होने के कारण उन्होंने नौकरी छोड़ी दी या फिर नौकरी ही नहीं की। वही 85 फीसदी महिलाओं ने कहा कि पब्लिक टॉयलेट हाइजेनिक नहीं हैं, लेकिन मजबूरी में इन्हें इस्तेमाल करने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं है।
पब्लिक टॉयलेट के स्थान पर बनें शी लाउंज
रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि भोपाल के दस नंबर मार्केट में बने शीलाउंज में महिलाओं के लिए सुविधाएं व्यवस्थित हैं। यहां गंदगी नहीं है और ये महिलाओं के लिए सुरक्षित भी हैं। यूएन वुमन संस्था ने सिफारिश की है कि शी लाउंज को मॉडल मानते हुए पूरे प्रदेश में इसी तरह के टॉयलेट बनाए जाने चाहिए, ताकि महिलाएं निसंकोच टॉयलेट का इस्तेमाल कर सकें।
Published on:
04 Jan 2018 02:07 pm
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