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नालों में पानी की लाइन और तालाब में नाले, घर तक कैसे पहुंचे साफ पानी

नालों में पानी की लाइन और तालाब में नाले, घर तक कैसे पहुंचे साफ पानी

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पानी बचाने के लिए राज्य के सभी ग्राम पंचायतों का बनेगा Water Security Plan

पानी बचाने के लिए राज्य के सभी ग्राम पंचायतों का बनेगा Water Security Plan

भोपाल। कोलार, नर्मदा, बड़ा तालाब और केरवा डेम के फिल्टर प्लांट से शुद्ध होकर निकला पानी आपके घर से 50 से 100 मीटर की दूरी पर प्रदूषित हो रहा है। इतना ही नहीं, यदि आपका घर किसी तालाब, नाले से एक किमी के दायरे में है तो भी आपको बोरवेल दूषित पानी दे रहा है। दरअसल जिस पाइप लाइन से गुजरकर ये शुद्ध पानी आपके पास पहुंच रहा है उसमें से 60 फीसदी लाइन कहीं न कहीं नाले या नाली से होकर गुजर रही है। इस खुली लाइन सीवेज मिल रहा है, जो घर पर दूषित पानी पहुंचा रहा है।


बोरिंग से पानी दूषित ही निकल रहा
इसी तरह शाहपुरा, छोटा तालाब, मोतिया तालाब या हलालपुर डेम जैसे जलस्त्रोतों से भले ही आप पानी नहीं ले रहे हो, लेकिन इनमें मिल रहे सीवेज ने इन्हें इतना दूषित कर दिया है कि ये पानी जमीन के भीतर काफी गहराई तक फैल गया है और इसने अपने आसपास करीब आधा किमी तक के दायरे का पानी खराब कर दिया है। इनके पास की कॉलोनियों में रहने वालों के बोरिंग से पानी दूषित ही निकल रहा है।

शाहपुरा तालाब में पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी पांडेय ने सरकारी एजेंसी एप्को में इसके आसपास के बोरिंग से पानी लेकर जांच कराई और ये स्थिति सही साबित हुई। जाहिर है, सभी सतही जलस्त्रोतों के साथ शहर का भूमिगत जल भी बड़े क्षेत्र में खराब हो गया है।


हैरानी और चिंता वाली बात ये हैं कि पानी को खराब करने वाले इन नए अलग तरह की स्थितियों से निपटने की बजाय शासन से लेकर प्रशासन और निगम नए क्षेत्रों में पाइप लाइन बिछाने या फिर पुराने फिल्टर प्लांट को दुरूस्त करके शुद्ध पानी की आपूर्ति का दावा कर रहा है।

ऐसे समझे स्थितियां


1. 1568 किमी की पाइप लाइन, 962 किमी कहीं न कहीं नाले को पार कर रही

शहर में जलवितरण के लिए नई और पुरानी 1568 किमी लंबी पाइप लाइन है। निगम की ही रिपोर्ट के अनुसार इसमें 962 किमी लाइन ऐसी है जो कहीं न कहीं नाले के गंदे पानी को पार कर रही है। 800 किमी की लाइन 32 साल पुरानी है और जर्जर हो गई है। इसमें नाले का पानी मिल रहा है।

2. 120 कॉलोनियों का भूजल तालाबों के गंदे पानी से खराब
शाहपुरा, चूनाभट्टी, 1100 क्वार्टर का क्षेत्र, काली माता मंदिर के आसपा, चार इमली, तुलसी नगर, ताज महल के आसपास, बेनजरी कॉलेज के पास का क्षेत्र, तलैया, जिंसी, लालपरेड और इसी तरह के तालाबों के आसपास के 120 के करीब क्षेत्रों में पानी ठीक नहीं है। तालाबों के आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष पांडे ने सैंपलिंग की थी, जिससे यहां पीने योग्य पानी नहीं निकला। इसके बाद झील संरक्षण प्राधिकरण ने तालाबों की डीपीआर बनवाई, जिसमें 120 कॉलोनियों के पानी को दुरूस्त करने तालाबों में सीवेज मिलने से रोकने की बात कही थी।

3. 06 तालाबों में 32 नाले आज भी मिल रहे

बड़ा तालाब, छोटा तालाब, शाहपुरा, पांच नंबर, मोतिया तालाब, नवाब सिद्दिक हसन तालाब में अब भी 32 नाले सीधे मिल रहे हैं। नालों को ट्रीट करके तालाबों में मिलाने की बीते सालों में 12 प्रोजेक्ट चले और इनपर 22 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हुए। बावजूद स्थिति नहीं सुधरी। बड़ा तालाब में शिरिन नदी की और से, छोटा तालाब में बुधवारा की और से, शाहपुरा में एकांत पार्क, पंचशील से लेकर त्रिलंगा की और से सीधे नाले मिल रहे हैं।

ये हैं शहर में पानी की स्थिति
- 9.7 मिलीग्राम से 79 मिलीग्राम प्रतिलीटर सोडियम

- 12 मिलीग्राम से 372 मिलीग्राम प्रतिलीटर सल्फेट
- 05 मिलीग्राम से 45 मिलीग्राम प्रतिलीटर पोटेेशियम

- 50 फीसदी शहर में पानी की हार्डनेस मानक से अधिक है
- 0.76 मिलीग्राम से 1.25 मिलीग्राम प्रतिलीटर फ्लोराइड

- 24 मिलीग्राम से 306 मिलीग्राम प्रतिलीटर अमोनिकल नाइट्रेड

ग्राउंड वाटर क्वालिटी भोपाल में
क्षेत्र- टीडीएस- फ्लोराइड- नाइट्रेट- सल्फेट

भानपुर- 978- 0.97- 41 - 372
रासलाखेड़ी- 928- 1.24- 38- 336

आरिफ नगर- 392- 1.14- 10- 95
अरेरा कॉलोनी- 160- 1.09- 5.2- 29

कोटरा सुल्तानाबाद- 640- 0.89- 22- 115
टीटी नगर- 208- 0.91- 09- 31

प्रोफेसर कॉलोनी- 144- 0.76- 07- 12
बैरागढ़- 504- 0.81- 15- 120

बरखेड़ी- 176- 0.76- 13- 34
नोट- करंट वल्र्ड एनवायरनमेंट की और से पानी की 2019 की पहली तिमाही में जारी जांच की रिपोर्ट के अनुसार।

एक्सपर्ट कोट्स

सबसे जरूरी है तालाबों के बफर जोन को संरक्षित रखना। तय दायरे में सघन वन हो ताकि पानी की शुद्ध बनी रही। तालाबों में सीवेज मिलने रोकने के लिए गंभीर प्रयास होते तो आज स्थिति बदल जाती। तालाबों के संरक्षण के प्रति गंभीर नहीं होने से भूजल भी दूषित हो गया है, आने वाले समय में दिक्कत और बढ़ेगी।
- डॉ. सुभाष सी पांडेय, पर्यावरणविद्


पानी की लाइन और सीवेज की लाइन अलग होना चाहिए। इन्हें एक दूसरे से मिलाना ठीक निर्णय नहीं है और दुर्भाग्य से शहर में बीते सालों में प्रोजेक्ट उदय से लेकर अब तक पानी और सीवेज की लाइन एक साथ डाली जा रही है। नालों से पानी की लाइन निकालना कहां कि समझदारी है। इससे घरों में गंदा पानी पहुंच रहा है।

कमल राठी, अर्बन एक्सपर्ट

साफ पानी शहरवासियों को मिले ये हमारी लक्ष्य है। पानी रोजाना देने के साथ साफ पानी देने को लेकर हम लगातार काम कर रहे हैं और पानी को दूषित करने वाली तमाम स्थितियों को खत्म करेंगे।
जयवर्धन सिंह , मंत्री, नगरीय विकास एवं आवास विभाग