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वाट्स एप पर गुहार: मिनटों में बची नन्ही मासूम की जान

रीवा। कभी रक्त की कमी में मरीज की जान गंवाने की खबरें आम हुआ करती थी, लेकिन संचार के हाईटेक दौर में सोशल मीडिया मददगार की भूमिका निभा रहा है। जिससे जरूरतमंदों को आसानी से रक्त उपलब्ध हो रहा है। जिससे मरीजों की जान बचाई जा रही है। ऐसा ही एक मामला क्रिसमस के दिन […]

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Suresh Mishra

Dec 26, 2015


रीवा।
कभी रक्त की कमी में मरीज की जान गंवाने की खबरें आम हुआ करती थी, लेकिन संचार के हाईटेक दौर में सोशल मीडिया मददगार की भूमिका निभा रहा है। जिससे जरूरतमंदों को आसानी से रक्त उपलब्ध हो रहा है। जिससे मरीजों की जान बचाई जा रही है। ऐसा ही एक मामला क्रिसमस के दिन का है। जब 18 महीने की नन्हीं मासूम को रक्त की जरूरत मिनटों में पूरी हो गई।

नन्हीं मासूम शिवी द्विवेदी पिता सतीश द्विवेदी निवासी मोहनपुरा पन्ना की निवासी है। रीवा के गांधी स्मारक अस्पताल शिशु विभाग के आईसीयू वार्ड में भर्ती है। शिवी को हार्ट की गंभीर बीमारी है। जिसमें एनीमिया की वजह से रक्त की कमी हो गई थी और रक्त चढ़ाने की अनिवार्य आवश्यकता थी। डॉक्टर ने परिजनों को अविलम्ब रक्त की व्यवस्था करने को कहा था। शिवी का रक्त समूह एबी पाजिटिव है। परिजनों ने अपने दोस्तों एवं परिचितों से सम्पर्क करने के साथ साथ संजय गांधी अस्पताल के रक्त कोष विभाग में संपर्क किया। कहीं से रक्त नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में मिशन संवेदना गैर सरकारी संगठन के प्रमुख प्रनत कनोडिया आगे आए और उन्होंने रक्तदान की अपील व्हाट्स एप पर की।


10 दिनों से नहीं था एबी पाजिटिव रक्त

पर्यटन के लिए संघर्ष करने वाले समाजसेवी सर्वेश सोनी को नन्हीं मासूम शिवी के बारे में पता चला तो वे बिना किसी उलझन में पड़े फौरन उसे रक्त देने पहुंच गए और रक्त देकर नन्हीं मासूम को नया जीवन देेने का काम किया। मालूम हो कि संजय गांधी अस्पताल के रक्त कोष में भी विगत 10 दिनों से एबी पाजिटिव रक्त समूह की कमी बनी हुई है। यह रक्त समूह दो हजार व्यक्तियों में से एक व्यक्ति का ही होता है।


जरूरतमंदों को रक्त देने की अपील

हर स्वस्थ्य व्यक्ति का कत्र्तव्य है रक्तदान करना Óपर हित सरिस धर्म नहीं भाईÓ पंक्ति को चरितार्थ करने वाले सिरमौर निवासी सर्वेश सोनी 22 बरस के हैं और अब तक 5 बार रक्तदान करके जरूरतमंद मरीजों की जिंदगी बचा चुके हैं। उनका कहना है कि रक्तदान हर स्वस्थ्य व्यक्ति का कत्र्तव्य है। एक स्वस्थ्य व्यक्ति हर 3 माह में स्वैच्छिक रक्तदान कर सकता है। रक्तदान करने से कभी किसी तरह की कोई कमजोरी नहीं आती है रक्तदान करने से और जरूरतमंदों की जिंदगी बचाने जैसी खुशी और कहीं नहीं है। सर्वेश ने सभी युवाओं से इस हेतु आगे आने जागरूक होने और स्वैच्छिक रक्तदान करने की अपील की है।

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