
delhi-mumbai expressway construction (फोटो- Freepik)
MP News: देश के पहले ग्रीनफील्ड दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे (Delhi-Mumbai Expressway) ने मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल को विकास की तेज रफ्तार से जोड़ दिया है। झाबुआ जिले से गुजरते ही रतलाम से टिमरवानी तक का सफर मिनटों में सिमट गया है, लेकिन गुजरात की सीमा पर एक्सप्रेस-वे अभी भी अधूरा होने के कारण यात्रियों को 'फुल स्टॉप' का सामना करना पड़ रहा है। नतीजतन एमपी से राजस्थान और दिल्ली की दूरी तो घट गई, मगर गुजरात जाने वालों को अब भी पुराने रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।
मध्यप्रदेश में एक्सप्रेस-वे पूरी तरह तैयार है, लेकिन गुजरात के हिस्से में करीब 87 किलोमीटर का काम अब भी अधूरा है। गोधरा से दाहोद के बीच महज 200 मीटर का एक छोटा सा हिस्सा हाई-टेंशन बिजली लाइन शिङ्क्षफ्टग के कारण अटका हुआ है। इसी वजह से आधिकारिक रूप से गुजरात की ओर आवागमन शुरू नहीं हो सका है। हालांकि टिमरवानी से आगे कुछ वाहन चालक अधूरे मार्ग से शॉर्टकट लेने लगे थे, लेकिन सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने अब इस मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया है।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे देश का सबसे लंबा 8-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे है। इसे किसी पुराने मार्ग को चौड़ा करके नहीं, बल्कि पूरी तरह नए रूट से विकसित किया गया है। खेतों और खाली जमीन से होकर निकले इस कॉरिडोर ने दिल्ली और मुंबई के बीच दूरी और यात्रा समय में ऐतिहासिक कमी की है। अनुमान है कि गुजरात का अधूरा हिस्सा 2026-27 के अंत तक पूरी तरह चालू हो जाएगा।
गुजरात की ओर एक्सप्रेस-वे अधूरा होने के कारण थांदला-मेघनगर-फूलमाल तिराहा और इंदौर-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर वाहनों का दबाव बढ़ गया है। खासकर सुबह और शाम के समय भारी वाहनों की आवाजाही से ट्रैफिक स्लो हो रहा है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि गुजरात के गोधरा-दाहोद सेक्शन में अटके मात्र 200 मीटर के हिस्से को प्राथमिकता से पूरा किया जाए। लोगों का कहना है कि जैसे ही यह कड़ी जुड़ जाएगी, झाबुआ सहित पूरे आदिवासी अंचल को पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
टिमरवानी से आगे कुछ वाहन चालक अधूरे एक्सप्रेस-वे से शॉर्टकट लेने लगे थे। इससे हादसों की आशंका बढ़ गई थी। प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए इस मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया है। पुलिस का कहना है कि नियम तोडऩे वालों पर सख्ती की जाएगी।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे झाबुआ जिले की सीमा से करीब 52 किलोमीटर तक गुजरता है। थांदला तहसील का टिमरवानी गांव इस एक्सप्रेस-वे का प्रमुख इंटर-सेक्शन बनकर उभरा है। इसके माध्यम से जिले के दो प्रमुख क्षेत्रों के कुल 18 गांव सीधे तौर पर एक्सप्रेस-वे से जुड़ गए हैं। इससे आवागमन के साथसाथ व्यापार, कृषि और रोजगार की संभावनाएं भी तेज हुई हैं।
गुजरात जाने वाले यात्रियों को एक्सप्रेस-वे से उतरकर थांदला-मेघनगर-फूलमाल तिराहा होते हुए इंदौर-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पकडऩा पड़ रहा है। इसके बाद पिटोल बॉर्डर से गुजरात में प्रवेश किया जा रहा है। इस मार्ग के कारण यात्रियों को करीब 47 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे समय और ईंधन की खपत बढ़ी है।
इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ मुकेश तिवारी ने बताया कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का झाबुआ क्षेत्र से गुजरना आदिवासी अंचल के लिए गेम- चेंजर साबित होगा। लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी, कृषि उपज को नए बाजार मिलेंगे और निवेश आकर्षित होगा। गुजरात का शेष हिस्सा पूरा होते ही यह कॉरिडोर एमपी-गुजरात व्यापार को नई ऊंचाई देगा। फिलहाल 200 मीटर का पैच छोटा जरूर है, लेकिन यही पूरी रफ्तार को रोक रहा है।
एक्सप्रेस-वे शुरू होने के बाद राजस्थान और दिल्ली की यात्रा जहां पहले के मुकाबले आधे समय में पूरी हो रही है, वहीं गुजरात की ओर जाने वाले यात्रियों को अब भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों का कहना है कि यदि गुजरात वाला हिस्सा जल्द चालू हो जाए, तो यह पूरा क्षेत्र व्यापार और रोजगार का बड़ा केंद्र बन सकता है। स्थानीय व्यापारी बताते हैं कि एक्सप्रेस-वे से इंदौर, कोटा और दिल्ली तक माल पहुंचाने में समय और खर्च दोनों घटे हैं। पहले दिल्ली का माल 20-22 घंटे में पहुंचता था, अब 14-15 घंटे में पहुंच रहा है। लेकिन गुजरात के लिए अब भी पुराना रास्ता लेना पड़ता है। (MP News)
Published on:
30 Jan 2026 01:20 am

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