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15 दिन पूर्व की थी तार फेंसिंग, जमीन निकली सरकारी, प्रशासन ने हटाया कब्जा

- जिला प्रशासन और नगर निगम ने 75 लाख से अधिक कीमत की आवासीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया

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15 दिन पूर्व की थी तार फेंसिंग, जमीन निकली सरकारी, प्रशासन ने हटाया कब्जा

जिला प्रशासन और नगर निगम ने 75 लाख से अधिक कीमत की आवासीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया

भोपाल. 15 दिन पूर्व तार फेंसिंग कर जमीन को अपना बताने वाले लोगों के पैरों के नीचे उस जमीन खिसक कई जब उन्हें पता चला जमीन सरकारी मद में दर्ज है। जिला प्रशासन और नगर निगम ने 34 सौ वर्गफीट जमीन पर लगाए गए सीमेंट पिलर और तारों को हटाकर जमीन पर अपने कब्जे में ले लिया है। बैरागढ़ एसडीएम मनोज उपाध्याय ने बताया कि शाहजहांनाबाद क्षेत्र में करीब 75 लाख रूपये कीमत की आवासीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है । इस जमीन पर यासमीन पत्नि जफर उल्ला खान अपना मालिकाना हक बता रहीं थीं। इस संबंध में एक अस्पष्ट पत्र भी उन्होंने एसडीएम को दिखाया, लेकिन जमीन खसरे में सरकारी मद में दर्ज थी। अतां एसडीएम बिना देरी किए जमीन को कब्जा मुक्त करा लिया। कार्रवाई से पूर्व यासमीन पक्ष के लोगों ने एसडीएम को वह पत्र भी दिखाया जिसमें वह जमीन उनके नाम होना बताया है। एसडीएम का कहना है कि जो जगह सरकारी मद में दर्ज है उसको बेचने का कोई पत्रक हो नहीं सकता। जो भी दस्तावेज हैं वे फर्जी ही माने जाएंगे।

भू माफिया अभियान के तहत जारी कार्रवाई में सोमवार को कालापानी ग्राम के सरपंच सदरुद्दीन की तरफ से किए गए अवैध निर्माण को कोलार एसडीएम क्षितिज शर्मा ने तुड़वा दिया। सरपंच की दबंगई का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि उसने बीस साल में धीेरे-धीरे कर पांच एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा कर उसमें बड़ा मकान, एक कच्चा मकान, दो बड़े वेयर हाउस, 11 दुकानें, पशुओं का बाड़ा बनाकर चारों तरफ से बाउंड्रीवॉल करा दी थी। इससे पहले कई बार यहां टीम गई लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। सोमवार को भारी पुलिसबल की मौजूदगी में यहां से पूरा कब्जा हटादिया है। एडीएम दिलीप यादव ने बताया कि कालापानी में कलेक्टर गाइडलाइन से जमीन की कीमत करीब 15 करोड़ के आस-पास है। इसे हटाने में जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस का सहयोग रहा है। इसके अलावा कई और अवैध निर्माणों को चिन्हित किया गया है। पूरे जिले में जल्द ही कुछ और बड़ी कार्रवाई सामने आएंगी। इस अवैध निर्माण के पीछे कुछ पुराने लोगों की मिलीभगत की चर्चा भी कार्रवाई के दौरान उठती रही। फिलहाल प्रशासन ने जमीन से मुक्त कर अपने अधिकार में ले लिया है।

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