
भोपाल. आज वर्ल्ड हैप्पीनेस डे है आज हम आपको जीवन में खुश रहने की छोटी छोटी वजह बता रहे हैं जिनसे आपके चेहरे पर हमेशा मुस्कुराहट बरकरार रख सकते हैं। खुश रहना जीवन जीने की अद्भुत कला है, खुश रहने की सबकी अपनी-अपनी वजहें होती हैं। कोरोना ने निराशा के साथ डर का जो माहौल दिया, उससे उबरने में सबसे कारगर रहा दूसरों को खुशियां बांटने की शुरुआत।
आज इंटरनेशनल डे ऑफ हैप्पीनेस है आज शहर के ऐसे चुनिंदा लोगों से मिलिए, जिन्होंने दूसरों को खुशियां बांटी हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना और लॉकडाउन ने कई लोगों के जीवन में तनाव बढ़ा दिया। ऐसे में इन लोगों ने फन एक्टिविटीज, कार्टून सीरियल्स के कैरेक्टर, योग और जोक्स जैसे तरीकों का सहारा लिया।
मुस्कुराहट बिखेरने वालों का कहना है कि बाहरी आनंद के साथ-साथ अंदर से सुकून होगा तो चेहरे पर मुस्कान हमेशा कायम रहेगी। हम बाजार से सब कुछ तो हासिल कर सकते हैं, लेकिन मुस्कान तो एक इंसान ही दूसरे को दे सकता है।
एसओएस बालग्राम के डायरेक्टर दीपक सक्सेना का कहना है लॉकडाउन के दौरान बच्चों में बहुत तनाव हो गया था। इस दौरान हमने स्पेशल चाइल्ड्स की खुशी का ख्याल रखा है। उनकी रक्षा के साथ हमने मस्ती की पाठशाला आयोजित की। इस दौरान बच्चों को उनकी पंसद के हिसाब से चित्रकला, कहानी, जोक्स, स्क्रिप्ट राइटिंग, इंडोर गेम्स आदि गतिविधियों कराई गई। कई बच्चों ने स्केटिंग भी सीखी। घरों में मदर आंटीज के साथ आर्ट एंड क्रॉफ्ट जैसी गतिविधियां भी आयोजित कर रहे हैं। हम वो एक्टिविटीज ही कराते हैं जिनसे उन्हें हर पल खुशी मिल सके।
अरुषि की एग्जीक्यूटिव को-आर्डिनेटर, सपना गुप्ता का कहना है कि बच्चों को खुश रखने के लिए उनकी पंसदीदा चीजों को शामिल करते हैं।साथ ही नए-नए लोगों से मिलवाते हैं। नई जगह लेकर जाते हैं। कोविड-19 के पहले हर साल बच्चों को ट्रिप पर लेकर भी जाते थे। आज प्रतिस्पर्धा के दौर ने जिंदगी में तनाव ला दिया है। इससे लोगों को खुशी के लिए समय की कमी हो गई है। पूरा समय काम में ही बीतने लगा है। मैं भी कोरोना पॉजिटिव थी तो घर में तनाव का माहौल था। इस दौरान घर में हाथ से कड़ाई करती थी। जिससे मन में खुशी मिलती थी। लोगों को खुश रहने का जरिया खुद तलाशना होगा। मुझे दूसरों की मदद करने में ही खुशी मिलती है।
एक्टिविस्ट किरण शर्मा ने कहा कि मुझे दूसरों को खुशी देकर ही खुशी मिलती है। हमारी संस्था सकारात्मक सोच से जरूरतमंद लोगों की मदद करती है। इसमें शिक्षा के साथ लोगों को अन्नदान कार्यक्रम किए जाते हैं। लॉकडाउन में 15 जोन में जरूरतमंदों को खाना बांटा गया। हमारी संस्था पिछले छह साल से काम कर रही है। इस दौरान दस गार्डनों को हरा-भरा किया है। आज यहां लोग जाकर आनंदित होते हैं तो हमें भी अच्छा लगता है।
Published on:
20 Mar 2021 11:08 am

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