भोपाल। आज वल्र्ड थिएटर डे है। दुनिया थिएटर के कुछ चुनिंदा अदाकारों को ही पहचानती है। ये वे नाम हैं, जिन्हें लोग भुलाना भी नहीं चाहते। इन्हीं नामों में से एक हैं हबीब तनवीर। वैसे तो ये जन्मे पाकिस्तान के स्वात में थे, पर भोपाल के रंगमंच को इन्होंने ही ऑक्सीजन दी। मतलब भोपाल का थिएटर इनके बिना आज अधूरा है। वर्ष 2009 में तनवीर साहब इस दुनिया को अलविदा कह गए, पर इनकी दो ख्वाहिशें अंतिम सांस तक अधूरी ही बनी रहीं। हबीब दा अपनी अपनी आत्मकथा लिखा रहे थे। इसका एक हिस्सा पूरा भी हुआ, पर बीच में ही उसकी सांसें टूट गईं। 86 साल की उम्र में भी हबीब दा में किसी नौजवान से कम ऊर्जा नहीं थी। वे हर वक्त काम के लिए लालायित रहे।