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नींबू पानी, दूध और दही पीकर ही वर्ल्ड चेंपियन बन गए बजरंग पूनिया

रेसलिंग चैंपियनशिप में चार पदक जीतने वाले पहलवान बजरंग पूनिया आए भोपाल, कहा— पहलवानों को जिम व दंगल में दम तोड़ते देखा है, ड्रग्स लेने से कुछ नहीं होता, मैं नींबू पानी, दूध और दही खाकर ही पहलवान बना हूं

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पहलवान बजरंग पूनिया आए भोपाल

भोपाल. वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में चार पदक जीतने वाले देश के एकमात्र पहलवान बजरंग पूनिया 29 साल के हो गए हैं। रविवार को वे भोपाल आए जहां उन्होंने एक निजी कार्यक्रम में शिरकत की। फिर टीटी नगर स्टेडियम में खिलाडिय़ों को आधे घंटे टिप्स दिए और कहा कि कड़ी मेहनत करो, बगैर मेहनत के रिजल्ट नहीं मिलता। यहां से वे बीजेपी ऑफिस भी गए।

स्टेडियम में खिलाडिय़ों को उन्होंने बताया कि मैं भी मेहनत के दम पर ही यहां तक पहुंचा हूं। उन्होंने चेताते हुए कहा कि अपने परफॉर्मेंस को बढ़ाने के लिए ड्रग्स और सप्लीमेंट का सेवन न करें। इससे कुछ नहीं होता। सादा खाना खाओ। नींबू पानी, दही और दूध पियो। बाहर की चीजों को अवाइड करो। मैं यही सब पी-खाकर बड़ा पहलवान बना हूं। मैंने बहुत सारे पहलवान देखे हैं जो ड्रग्स का सेवन कर जिम और दंगल में दम तोड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगर आप ड्रग्स का सेवन करते पकड़े जाते हैं तो चार साल का बैन भी लग सकता है।

जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होती हम ट्रायल नहीं देंगे
उन्होंने भारतीय कुश्ती संघ के खिलाफ चल रहे विरोध को लेकर कहा कि महिला पहलवानों ने जो आरोप लगाए हैं वो सही हैं। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी तब तक हम ट्रायल नहीं देंगे। बड़े खिलाड़ी ट्रायल क्यों नहीं देते इस सवाल पर पूनिया ने कहा कि ट्रायल देने के लिए हर बार हमें अपना वेट लूज करना होता है। अगर तीन बार वेट लूज करते हैं कमजोरी आती है। इसका असर हमारे प्रदर्शन पर पड़ता है। फेडरेशन को सीनियर पहलवानों का एक बार ही ट्रायल लेना चाहिए। बता दें कि भारतीय कुश्ती संघ के खिलाफ प्रमुख खिलाडिय़ों द्वारा लगाए गए यौन दुराचार, वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक चूक के आरोपों की जांच के लिए निरीक्षण समिति का गठन किया गया था जिसकी जांच चल रही है। इसकी अध्यक्षता खेल रत्न पुरस्कार विजेता और एथलीट आयोग की अध्यक्ष एमसी मैरीकॉम कर रही हैं।

प्रेक्टिस के लिए स्कूल छोड़ देता था
बजरंग पूनिया ने बताया कि मैंने सात साल की उम्र में पिता की वजह से पहलवानी में कदम रखा था। इसी वजह से मेरी दिलचस्पी भी इस खेल में शुरुआत से ही रही। पहलवानी के लिए स्कूल छोड़कर अभ्यास के लिए अखाड़ा चला जाता था। उन्होंने खिलाडिय़ों से कहा कि आपको खेल के साथ पढ़ाई पर भी ध्यान देना चाहिए। मोबाइल का उपयोग कम करें।