
बीकानेर . जिले में अस्थमा के रोगी बढ़ रहे हैं। पीबीएम से संबद्ध श्वसन एवं टीबी अस्पताल की ओपीडी में पहुंचने वाले रोगियों में करीब ७० प्रतिशत लोग श्वांस में तकलीफ के पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक बीकानेर में अस्थमा का एक मुख्य कारण धूल कुटकी (डस्ट माइट) भी हैं। पूर्व में हुए नेशनल सर्वे में बीकानेर में अस्थमा का अनुपात ३.५ प्रतिशत था, जो अब बढ़कर ११ प्रतिशत हो गया है।
ये हैं कारण
धूल, सर्दी, पराग, जानवरों के फर, वायरस, हवा के प्रदूषक और कई बार भावनात्मक गुस्सा भी अस्थमा अटैक का कारण बनता है। वंशानुगत, श्वांस नलियों में सूजन आदि से श्वांस लेने में दिक्कत होती है।
शारीरिक लक्षण
छाती में जकडऩ, श्वांस लेने में तकलीफ, खांसी, मौसम में बदलाव पर खांसी या श्वांस की तकलीफ बढऩा, खेलने या व्यायाम के दौरान श्वांस ज्यादा फूलने लगता है।
क्या है 'धूल कुटकी'
वाहनों से उडऩे वाली मिट्टी जो बहुत ही बारीक होती है। यह मिट्टी हवा के साथ घरों में जम जाती है। घरों में सफाई करने के दौरान उड़ती रहती है। इससे अस्थमा होने की आशंका रहती है। अस्थमा एक दीर्घकालिक श्वांस से जुड़ी बीमारी है। फेंफड़ों की श्वांस की नलियों में सूजन आ जाती है, जिससे श्वांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं और फेफड़े अति संवेदनशील हो जाते हैं। किसी भी तरह की एलर्जी अस्थमा अटैक में ट्रिगर का काम करती है।
यह है उपाय
चिकित्सक बताते हैं कि वर्तमान में इनहेलेशन थैरेपी अस्थमा के इलाज का मुख्य आधार है। इस थैरेपी के साइड इफेक्ट बहुत कम है। नियमित दवाएं व समय-समय पर चिकित्सक को चैकअप कराकर पीडि़त व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है।
आंकड़ों पर नजर
विश्वभर में ३३४ मिलियन अस्थमा रोगी है, जिनकी संख्या में २०२५ तक १०० मिलियन का इजाफा होने की आशंका
है।चिकित्सकों के एक बड़े अनुमान के मुताबिक विश्व की ५-१० प्रतिशत जनसंख्या अस्थमा रोग से पीडि़त है।
चिकित्सकीय सलाह लें
&आंखों में खुजली, लंबे समय तक खांसी और सीटी बजना, श्वांस लेने में सारंगी बजने जैसी आवाज आना चिंंता का विषय है। यह सब अस्थमा की निशानी है। ऐसे मरीज शीघ्र चिकित्सक की सलाह लेवें। धुलभरी आंधियां भी अस्थमा को जन्म देती है।
डॉ.गुंजन सोनी, प्रोफसेर एवं विभागाध्यक्ष टीबी व श्वसन रोग विभाग पीबीएम
Published on:
01 May 2018 11:35 am
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