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राजस्थान में दर्दनाक हादसे से देवर-भाभी की मौत, परिवार में छाया मातम

Bikaner Road Accident News: ट्रक-जीप की जोरदार टक्कर से देवर-भाभी की मौत के बाद घर में मातम छा गया।

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Bikaner Road Accident: बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ में स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग पर गुरुवार को बिग्गाबास रामसरा के पास हुई एक भीषण सड़क दुर्घटना में एक महिला सहित दो लोगों की मौत हो गई और दो जने गंभीर रूप से घायल हो गए।

जानकारी के अनुसार, बिग्गाबास रामसरा निवासी मामराज पुत्र श्रवणराम जाखड़, रामधन पुत्र पुरखाराम जाखड़, मनोज पुत्र रामचन्द्र जाखड़ और तुलछीदेवी पत्नी रामचंद्र जाखड़ गुरुवार दोपहर को जीप में सवार होकर अपने गांव से श्रीडूंगरगढ़ आ रहे थे। बिग्गाबास रामसरा से निकलते ही उन्होंने जीप में सवार एक अन्य व्यक्ति को होटल के पास उतारने के लिए जीप को सड़क पर रोका।

इस दौरान पीछे से आ रही एक ट्रक ने जीप को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि जीप के परखच्चे उड़ गए और जीप में सवार चारों जने गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को आपणो गांव सेवा समिति और डॉ. एपीजे वेलफेयर सोसायटी की एम्बुलेंस से उपजिला अस्पताल पहुंचाया गया। जहां चिकित्सकों ने मामराज जाखड़ (60) और तुलछी देवी (40) को मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर रूप से घायल रामधन व मनोज को बीकानेर रेफर कर दिया।

देवर-भाभी की दर्दनाक मौत

बिग्गाबास रामसरा सरपंच लक्ष्मणराम जाखड़ ने बताया कि हादसे में मृतक और घायल एक ही परिवार के सदस्य थे। मृतक मामराज और तुलछीदेवी रिश्ते में देवर भाभी थे। घायल मनोज मृतका तुलछीदेवी का बेटा और रामधन मृतक मामराज के रिश्ते में लगाने वाले भाई का बेटा है।

सड़क दुर्घटना का वाक्या पास ही लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया। दुर्घटना की सूचना मिलने पर सीओ निकेत पारीक व थानाधिकारी इंद्रकुमार भी मौके पर पहुंचे और घटना स्थल का मौका मुआयना किया। बिग्गा सरपंच जसवीर सारण व सामाजिक कार्यकर्ता संतोष ओझा भी मौके पर पहुंचे, तो वही सीताराम सियाग ने बीकानेर पीबीएम अस्पताल में पहुंचकर घायलों को त्वरित उपचार दिलवाने में मदद की।

ट्रॉमा सेंटर की कमी हुई महसूस

क्षेत्र में होने वाले सड़क हादसों में लगातार लोगो की मौत हो रही है। गुरुवार को भी सड़क हादसे में दो जनों की मौत हो गई और दो जने गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के दौरान एक बार फिर से ट्रॉमा सेंटर की कमी खली। जागरूक नागरिकों का कहना था कि काश करीब एक वर्ष पहले स्वीकृत ट्रॉमा बना गया होता तो क्या पता दोनों मृतकों में से किसी की जान बच जाती।

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