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Bikaner Crime News: बीकानेर में चर्चित लालूराम हत्याकांड में आया फैसला, तीन दोषियों को मिली सजा

बीकानेर के केसरदेसर जाटान हत्याकांड (2021) में अदालत का फैसला आया। हत्या के मामले में तीन दोषियों को आजीवन कारावास और एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा दी गई।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला। फाइल फोटो-पत्रिका

बीकानेर। देशनोक थाना क्षेत्र के केसरदेसर जाटान गांव में वर्ष 2021 में हुए चर्चित लालूराम हत्याकांड में अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक अभियुक्त पर एक-एक लाख रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है।

अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। फैसला बुधवार को अपर सेशन न्यायाधीश संख्या-5 के न्यायाधीश अनुभव सिडाना ने सुनाया।

धारा 302/34 के तहत दोषी करार

न्यायालय ने केसरदेसर जाटान निवासी रामेश्वरलाल (61) पुत्र धन्नाराम, मांगीलाल (34) पुत्र भगवानाराम तथा जगदीश (33) पुत्र रामेश्वरलाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 एवं वैकल्पिक 302/34 के तहत दोषी माना। अदालत ने तीनों के विरुद्ध सजा वारंट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

साथ ही दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के तहत अनुसंधान, जांच एवं विचारण के दौरान न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को मूल सजा में समायोजित करने का आदेश दिया है।

21 गवाह, 30 दस्तावेज पेश

अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में 21 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए और 30 दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। लंबी सुनवाई के बाद न्यायालय ने साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर तीनों अभियुक्तों को दोषी मानते हुए कठोर दंड सुनाया। पीड़ित पक्ष की ओर से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता रामरतन गोदारा ने की।

जानिए पूरा मामला

प्रकरण के अनुसार 13 मई 2021 को शाम करीब 4:30 बजे परिवादी ओमप्रकाश निवासी केसरदेसर जाटान ने देशनोक थाने में रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट में बताया गया कि वह अपनी मां और छोटी बहन के साथ खेत व पशुओं के कार्य में व्यस्त था। गीगासर रोड स्थित खेत में घुसे पशुओं को निकालने के लिए वह जा रहा था।

तभी पास के खेत से उसके पिता लालूराम की आवाज आई “मार दिया, मार दिया बेटा ओम, भागकर आओ।” चीख सुनकर वह मौके पर पहुंचा, जहां आरोपियों को उसके पिता पर हमला करते देखा। गंभीर रूप से घायल लालूराम को अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच की और पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।