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सावधान ! शहर में बाइक अपनी रिस्क पर पार्क करें, चोर रेकी पर…

बढ़ती चोरी की वारदातें, पुलिस के लिए चुनौती

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सावधान ! शहर में बाइक अपनी रिस्क पर पार्क करें, चोर रेकी पर...

सावधान ! शहर में बाइक अपनी रिस्क पर पार्क करें, चोर रेकी पर...

केस एक :- मुरलीधर व्यास कॉलोनी निवासी रोहिणी कुमार हर्ष २५ जुलाई को पीबीएम अस्पताल आया। यहां उसने बाइक पार्क की लेकिन शाम सवा पांच बजे बाइक लेने गया तो वह गायब थी। इस संबंध में उसने सदर पुलिस थाने में अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

केस दो :- शिवबाड़ी की हरिजन बस्ती निवासी बाबूलाल वाल्मीकि २३ जुलाई को पीबीएम अस्पताल गया। वह बाहर परिसर में गाड़ी खड़ी कर गया और डेढ़ बजे वापस आया तब गाड़ी गायब थी। इस संबंध में उसने २४ जुलाई को सदर थाने में मामला दर्ज कराया।


बीकानेर। जिले में बढ़ती चोरी की वारदातों ने आमजन और पुलिस की नाक में दम कर रखा है। चोरी-नकबजनी की वारदातें लगातार हो रही है। जिलेभर के अलावा शहर में बाइक चोरी की घटनाएं जिस तेजी से बढ़ रही है, उससे पुलिस के सामने बाइक चोर चुनौती बनकर खड़े हो गए हैं। हर में हर माह औसतन दस बाइक चोरी को रही है यह वह आंकड़े हैं, जिनके मामले संबंधित पुलिस थाने में दर्ज हुए हैं। शहर में रात का अंधेरा हो या दिन का उजाला बाइक चोर चलती गाड़ी के पहिए खोल ले जाने की तर्ज पर बाइक चुराकर ले जाते हैं। पुलिस में मामला दर्ज होता है लेकिन लंबे समय तक बाइक का पता चलता है ना ही बाइक चुराने वाले का।

पीबीएम से हर सप्ताह तीन बाइक चोरी
पीबीएम अस्पताल में चोरों ने डेरा डाल रखा है। सदर थाने में जुलाई माह में बाइक चोरी के दर्ज मामलों में सर्वाधिक पीबीएम अस्पताल परिसर से बाइक चोरी होना है। शहरभर में हर दिन औसतन ८ से दस बाइक चोरी हो रही है। चोरों ने पीबीएम अस्पताल को अपना मजबूत ठिकाना रखा है। यहां लोगों की सर्वाधिक आवाजाही रहती है, जिससे चोरों को रेकी करने के बाद वारदात करने में आसानी होती है। २२ जुलाई की रात को पीबीएम अस्पताल से बाइक चोकी कर ले जाते एक युवक को पुलिस ने भी पकड़ा था।

पुरानी गैंग के सदस्यों पर शक
पुलिस बाइक चोरी के मामले में पुरानी वारदात को अंजाम देने वालों से पूछताछ करती है वहीं चोरी के मामलो में जेल से बाहर आए लोगों से भी पूछताछ करती है लेकिन चोरी की वारदातों पर अंकुश नहीं लग पाता। पुलिस ने एक वारदात का खुलासा करती है तब तक शहर में चार-पांच अन्य वारदातें हो जाती है। बाइक व घरों, प्रतिष्ठान में चोर गिरोह सक्रिय है। पुलिस को शक है कि चोर गैंग सक्रिय है जो वारदात करने के बाद एक-दो महीने निष्क्रिय रहती है और बाद में फिर सक्रिय हो जाती है।

पुलिस की कार्रवाई रामभरोसे
पुलिस की चोरी के मामले में कार्रवाई ढीली है। पुलिस केवल वाहनों की चेकिंग और चालकों से पूछताछ तक ही सीमित रहती है। पुलिस पूर्व में हुई चोरी की वारदातों में संलिप्त रहे लोगों के कामकाज और आमदनी के बारे में भी जानकारी जुटाती है लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात वाला है।

चोरी के मामले दर्ज करने में भी एतराज
अक्सर देखने में आता है कि पुलिस कई बार चोरी के मामले दर्ज बाद में करती है। कई बार ऐसे मामले तक सामने आ चुके हैं जब वारदात हुई और उसका आरोपी पकड़ा गया तब पुलिस ने मामला दर्ज किया है। बाइक व छिटपुट चोरी के मामले में पुलिस दर्ज करने में भी आनाकानी करती है। पुलिस ऐसे मामलों में परिवाद जांच के नाम पर टालमटोल करती रहती है।


इनका कहना है...
चोरी की वारदातों को ट्रेस आउट करने में पुलिस काफी मशक्कत करती है। कई बार चोर पकड़े जाते हैं और उनसे बाइकें बरामद भी होती है। पुलिस पुरानी वारदातों में पकड़े गए और चोरी मामले में जेल से छूटे लोगों पर निगरानी रख रही है। आमजन भी सचेत रहे। वाहन पार्किंग स्थल पर खड़ा करें।
पवन कुमार मीणा, एएसपी सिटी