
दुनिया भी गजब तमाशा है, उठते हुए पर हंसती है, गिरते हुए पर दया करती है जैसे संवाद से अभिनेत्री मीना कुमारी ने अपने दिल में दफन दर्द के गुबार को बयां किया। सोमवार को अभिनेत्री मंदाकिनी जोशी ने मीना कुमारी के दर्द को अभिनय के माध्यम से मंच पर साकार किया।

रजत पर्दे पर अपने अभिनय की स्वर्णिम आभा बिखेरने वाली मीना कुमारी का व्यक्तिगत जीवन दुखद और तन्हा रहा। यूएस अकादमी की ओर से मंदाकिनी जोशी के निर्देशित व अभिनीत नाटक में मीना कुमारी के उसी दर्द को बखूबी दर्शाया गया। नाटक की प्रभावी प्रस्तुति ने दर्शकों को झकझोर दिया।

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र इलाहबाद, नगर विकास न्यास बीकानेर और विरासत संवद्र्धन संस्थान बीकानेर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार रंग नाट्य समारोह के अंतिम दिन सोमवार को दर्द का एक दरिया : मीना कुमारी का मंचन किया गया।

मधुप शर्मा की कृति आखिरी अढाई दिन पर आधारित इस नाटक का रूपांतरण प्रमोद चमोली ने किया। नाटक में मंदाकिनी जोशी और प्रीति सिंह ने अभिनय किया। इसके अलावा केके रंगा, उत्तम सिंह, राजशेखर शर्मा, श्रीबल्लभ पुरोहित आदि ने सहयोग किया। संचालन मधुकांत मिश्रा ने किया। प्रभारी बालमुकुंद थे। राजेन्द्र शर्मा ने आभार जताया।