
रसद विभाग में राशन वितरण की दोहरी जिम्मेदारी देने का काम वर्षों से चल रहा है। इस गोरखधंधे में उन्हीं उचित मूल्य दुकानदारों को मौका मिलता है, जो अधिकारियों के नजदीक बने रहते हैं। दोहरी जिम्मेदारी के इन आंकड़ों को देखें तो घूम-फिर कर बार-बार उन्हीं लोगों को यह जिम्मेदारी मिल रही है।
हालांकि राज्य सरकार ने हाल ही एक आदेश जारी कर छह माह से अधिक निलंबन नहीं होने तथा एक से अधिक दोहरी जिम्मेदारी नहीं देने के निर्देश जारी किए हैं, लेकिन अधिकारी अपने उच्चाधिकारियों के आदेशों की पालना भी नहीं कर रहे। बीकानेर शहर में २८ उचित मूल्य दुकानदारों के पास राशन वितरण की दोहरी जिम्मेदारी है।
उचित मूल्य दुकान में अनियमितताएं पाए जाने पर अन्य उचित मूल्य दुकानदार को राशन वितरण की दोहरी जिम्मेदारी सौंप दी जाती है।
अधिकारी नहीं उठाते फोन
रसद विभाग के घोटालों को लेकर 'राजस्थान पत्रिका' में प्रकाशित शृंखलाबद्ध खबरों के बाद महकमे के अधिकारियों और इनसे जुड़े तथाकथित दलालों में अफरा-तफरी मची है। सूत्रों की मानें तो घोटालों में शामिल उचित मूल्य दुकानदार अब विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। राशन वितरण व्यवस्था में सामने आ रही गड़बडि़यों से सहमे विभाग के अधिकारियों ने फोन उठाने भी बंद कर दिए हैं। कई प्रवर्तन अधिकारियों ने तो अपने मोबाइल तक बंद कर लिए।
वैज्ञानिकों ने दी नई किस्मों को शामिल करने की सलाह
क्षेत्रीय अनुसंधान प्रसार सलाहकार समिति से जुडी संस्थाएं और वैज्ञानिकों का पूरा ध्यान फसलों की उत्पादकता बढ़ाने की तरफ है। इसके लिए फसलों की समयबद्धता, बिजाई से पहले उर्वरक देने, खेतों को खरपतवार से मुक्त रखने, प्रति इंच जमीन और प्रति बूंद पानी को पैदावार से जोडऩे, नई किस्मों को पैकेज ऑफ प्रैक्टिस में शामिल करने की सलाह दी गई है। छह तरह की अनुशंसाएं तथा अनुसंधान के नए बिन्दु तय किए गए हैं।
स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कृृषि अनुसंधान केन्द्र के सभागार में बीकानेर कृषि संभाग स्थित आईसीएआर, कृषि अनुसंधान केन्द्र, कृषि विज्ञान केन्द्र, काजरी, राष्ट्रीय शुष्क उद्यानिकी संस्थान तथा अन्य संस्थानों के ७० वैज्ञानिकों ने दो दिनों के मंथन में यह निष्कर्ष जारी किए हैं। इन वैज्ञानिकों ने बैठक के दूसरे बुधवार को पहले चरण केवीके में लगी बाजरा, मूंगफली, मूंग, मोठ और ग्वार की फसलें देखी तथा जैविक लोकी की खेती का निरीक्षण किया।
दूसरे चरण में बीकानेर, चूरू तथा जैसलमेर इलाके में गर्मी एवं सर्दी में फसलों की मौसम प्रतिरोधक किस्मों पर काम करने की अनुशंसा की गई। जैसलमेर में खड़ीन की फसलों पर अनुसंधान के बिन्दु रखे गए। बारानी चना के प्रतिरोधक बीज बनाने तथा किनोवा के पैकेज ऑफ प्रक्टिस विकसित करने की अनुशंसा की गई। समिति ने छह तरह के अनुमोदन जारी कि ए।
इसमें पहला वर्ष भर हरे चारे की उपलब्धता के लिए संकर बाजरा उत्पादन की तकनीक बताई गई। कम पानी में अधिक उत्पादन लेने के लिए फसल में नाइट्रोजन देने की तकनीक बताई गई। सब्जियों में पतागोभी की लक्षित उत्पादन लेने की तकनीक बताई। गेहूं में बीजो उपचार में दीमक के प्रकोप से निजात के लिए ईमाडो क्लोरीफीड की अनुशंसा की गई।
अनुसंधान की दिशा में जैसलमेर में गेहूं की प्रति हैक्टेयर पैदावार बढ़ाने के लिए समयबद्धता का ध्यान रखने, बुवाई में बीजों की उचित मात्रा डालने, किनोवा और अजवाइन की नई किस्मों पर प्रयोग कर पैकेज ऑफ प्रैक्टिस में डालने का निर्णय किया गया।
Published on:
14 Sept 2017 01:23 pm
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