
बीकानेर. भाग दौड़ और तनाव भरी जिंदगी में हर व्यक्ति रोज कुछ समय अपने लिए भी निकालना चाहता है। समय और स्थान भी ऐसा हो, जिसमें कुछ देर के लिए वह प्रकृति से जुड़ने के साथ अपने मन के अनुकूल चर्चा, भ्रमण, व्यायाम, मनोरंजन कर सके। शहर में दर्जनों स्थानों पर बने पार्क लोगों लोगों के मन को सुकून दे रहे हैं। पार्कों में लगे पौधे, हरियाली, दूब जहां प्राकृतिक वातावरण में कुछ देर रहने के लिए मजबूर करते हैं, वहीं ओपन जिम, भ्रमण पथ से शारीरिक व्यायाम भी हो जाता है। सुबह और शाम रोज पार्कों में मिलने, बैठने पर आपसी संवाद और चर्चाओं के दौर भी चलते हैं। पार्कों में बच्चों को खेलने के लिए पर्याप्त स्थान, झूले मनभावन लगते हैं, वहीं खेलकूद के भी दौर चलते रहते हैं।
नियमित दिनचर्या में शामिल
लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर अधिक जागरूक होने लगे हैं। खास बात यह है कि सुबह से रात तक घरेलू कार्यों में व्यस्त रहने वाली महिलाएं भी अब अपनी नियमित दिनचर्या में पार्क में पहुंचने, भ्रमण को शामिल कर चुकी हैं। कई पार्कों में शाम को महिलाओं के समूह भ्रमण के साथ आपसी चर्चा में व्यस्त नजर आती हैं। सुबह और शाम पार्कों की रौनक देखते ही बनती है।
श्रमदान, पौधरोपण और देखभाल भी
इन पार्कों से जुड़े लोग, विकास समितियां और सेवाभावी रोज पार्क की नियमित देखभाल भी करते हैं। साफ-सफाई के लिए श्रमदान करते हैं। पौधरोपण का क्रम चलता रहता है। पार्क की चारदीवारी से लेकर लाइट, कुर्सियां, भ्रमण पथ, पौधों, दूब की देखभाल का सिलसिला चलता रहता है। कई पार्कों में लोग अपनी निजी राशि भी विकास कार्यों में लगा रहे हैं।
ओपन जिम से बनारहे सेहत
शहर के अनेक पार्कों में ओपन जिम की सुविधा है। ओपन जिम में लगे उपकरणों पर सुबह और शाम लोग व्यायाम करते हैं। इनमें बच्चे, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल हैं। पार्कों में अनेक लोग ओपन जिम में शारीरिक व्यायाम के लिए भी नियमित रूप से पहुंचते हैं। ओपन जिम में व्यायाम से लोगों को सुकून भी प्राप्त होता है।
आपसी संवाद के केन्द्र
नौकरी, व्यवसाय, स्कूल, कॉलेज, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, घरेलू कार्यों में व्यस्त रहने वाले लोग पार्कों में पहुंचकर कुछ पल के लिए सुकून महसूस करते हैं।यहां घूमने, व्यायायम के लिए पहुंचने वाले लोगों से मुलाकात होती है, आपसी चर्चा, संवाद होता है। एक दूसरे का हालचाल पूछते हैं। किसी व्यक्ति के सामने आई समस्याओं पर संवाद के साथ समाधान के लिए सुझाव भी मिलते हैं। बुजुर्ग जो अपने घरों में बैठे रहते हैं, सुबह और शाम दूसरे लोगों से मुलाकात, बातचीत का अवसर भी मिलता है।जिन क्षेत्रों और कॉलोनियों में पार्क स्थित हैं, उन क्षेत्रों के लोग पार्कों को लेकर अधिक संवेदनशील हुए हैं। शासन-प्रशासन की मदद से जहां पार्कों के विकास में प्रयास करते रहते हैं, वहीं पार्क विकास समिति, स्थानीय समितियों के माध्यम से भी पार्कों का विकास हो रहा है।
सवा सौ से अधिक पार्क
शहर में सवा सौ से अधिक पार्क हैं। पार्क नगर निगम, नगर विकास न्यास के क्षेत्राधिकारों में हैं। कई पार्कों की देखभाल स्थानीय निवासी भी कर रहे हैं। कई पार्कों के विकास और देखभाल के लिए विकास समितियां भी बनी हुई हैं।
Published on:
31 Aug 2024 11:26 pm
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