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पारंपरिक रावत नाच के लिए सजने लगे शहर के बाजार

देवउठनी एकादशी को रावत नाच की शुरुआत होगी इसके लिए अभी से तैयारी शुरू हो गई है

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Kajal Kiran Kashyap

Nov 04, 2016

rawat nacha

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बिलासपुर. देव उठनी एकादशी के साथ ही यदुवंशियों के रावत नाच की शुरुआत होगी। इसके लिए बाजार सजने लगा है। इस नृत्य में पारंपरिक वेशभूषा धारण करते हुए नृत्य कला, जौहर व शौर्य का प्रदर्शन करते हुए आशीर्वाद देते हैं। बाजार में रावत नाच के पारंपरिक कपड़े व आभूषण के दुकान सज गए हैं, जिसकी खरीदारी के लिए शनिचरी व बुधवारी में पहुंच रहे हैं।




रावत नाच के कपड़े व आभूषण बहुत ही आकर्षक होते हैं। एक-एक चीज का अपना अलग महत्व होता है। इस नृत्य में रेशमी सूती कारीगरी से युक्त रंगीन कुर्ता व जैकेट तथा घुटनों तक कसी हुई धोती धारण करते हैं। पैरों में जूते, कमर में करधन, गले में तिलरी-सुतरी, मुंह पीले रंग के रामरज से पुता हुआ, आंखों में रंगीन चश्मा, सिर पर कागज के फूलों से बना हुआ गजरा, दाएं हाथों में लाठी, बाएं हाथ में ढाल सम्भाले हुए, कौडिय़ों की माला गले से कमर तक धारण करते हैं।




देवउठनी एकादशी को रावत नाच की शुरुआत होगी इसके लिए अभी से तैयारी शुरू हो गई है। बाजार में डंडा, जूते, तिलरी सुतरी, कागज के फूलों का गजरा, करधन, कौडियों की माला सहित अन्या सामग्री की बिक्री शुरू हो गई है। व्यापारी रामसहाय ने बताया कि नए कपड़े व रावत नाच से संबंधित सामग्री की पूछ परख शुरू हो गई है।




घर-घर जाकर देंगे आशीर्वाद : रावत नाच की पंरपरा सदियों से चली आ रही है। एक पखवाड़े तक घर-घर जाकर दोहे व छंदों के माध्यम से लोगों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।



बजगरियों व नर्तकी की लगेगी बोली : रावत नाच के लिए शनिचरी व गोड़पारा क्षेत्र में बजगरियों व नर्तकी की बोली लगेगी। एक-दो दिन में पूरा बाजार सजेगा, जहां पर बजगरियों व नर्तकी की टीम होगी। नृत्य करके दिखाने के बाद उसे रावत नाच दल एक पखवाड़े के लिए तय करेंगे।
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