
नाबालिग बेटी से रेप के दोषी सौतेले पिता को उम्रकैद की सजा ( AI Photo )
Bilaspur High court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपनी नाबालिग सौतेली बेटी का बार-बार यौन शोषण करने के दोषी व्यक्ति की आपराधिक अपील खारिज कर आजीवन कारावास बरकरार रखा है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा, जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि किसी नाबालिग पीड़िता की गवाही सुसंगत और भरोसेमंद पाई पाई जाती है, तो बिना किसी स्वतंत्र पुष्टि के भी दोषसिद्धि के लिए वह पर्याप्त है।
मामला 2014 की एक घटना से जुड़ा है। अपीलकर्ता विश्वनाथ सोनी ने कथित तौर पर अपनी नाबालिग सौतेली बेटी (पीड़िता) को काम के बहाने खैरबार स्थित एक घर में ले जाकर उसके साथ जघन्य यौन कृत्य किए। यह शोषण लगभग दो वर्षों तक जारी रहा। मामले का खुलासा दिसंबर 2015 में हुआ जब पीड़िता के स्कूल में ‘चाइल्ड लाइन 1098’ द्वारा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम से प्रेरित होकर पीड़िता ने अपनी आपबीती एक दोस्त को और बाद में चाइल्ड लाइन कर्मियों को बताई।
बच्ची द्वारा अपने यौन शोषण का खुलासा करने के बाद 17 दिसंबर 2015 को अंबिकापुर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई। ट्रायल कोर्ट (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, एफटीसी सरगुजा) ने 24 नवंबर 2018 को अपीलकर्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 377 और पॉक्सो अधिनियम की धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
अपीलकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट के निष्कर्ष त्रुटिपूर्ण थे और साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया गया था। यह दलील दी गई कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे दोष साबित करने में विफल रहा और पीड़िता की गवाही में विरोधाभास और खामियां थीं। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि चिकित्सा साक्ष्य आरोपों का निर्णायक रूप से समर्थन नहीं करते हैं और झूठे फंसाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
Bilaspur High Court: बेटे की डूबने से मौत, आर्थिक सहायता नहीं मिलने से मां ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा, जानें पूरा मामला
बेटे की डूबने से मौत के बाद आर्थिक सहायता नहीं मिलने पर एक मां को आखिरकार बिलासपुर हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। मामले में सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने संबंधित राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिया है, पढ़ें पूरी खबर..
Updated on:
09 May 2026 02:08 pm
Published on:
09 May 2026 02:08 pm
