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Bilaspur High Court: सरपंच आत्महत्या केस में आरोपी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, याचिका खारिज, सुसाइड नोट के आधार पर दर्ज हुआ था मामला

High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत छतौना के तत्कालीन सरपंच संतकुमार पैकरा आत्महत्या मामले में आरोपी अजय सिंह को राहत देने से इनकार कर दिया है।

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Photo Patrika)

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Photo Patrika)

Bilaspur High Court: हाईकोर्ट बिलासपुर के कोटा थानाक्षेत्र के ग्राम पंचायत छतौना के तत्कालीन सरपंच संतकुमार पैकरा आत्महत्या मामले में आरोपी अजय सिंह की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई काफी आगे बढ़ चुकी है और छह अभियोजन गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं, इसलिए इस स्तर पर आपराधिक कार्यवाही को रद्द नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया है।

मेरे खिलाफ प्रताड़ना का कोई साक्ष्य नहीं

याचिकाकर्ता अजय सिंह की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि चार्जशीट और गवाहों के बयानों में ऐसा कोई प्रत्यक्ष आरोप नहीं है, जिससे आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला बनता हो। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता का केवल पुराना व्यावसायिक संबंध था और उसे बेवजह मामले में फंसाया गया है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला भी दिया, जिसमें सह आरोपी को राहत मिली थी।

आत्महत्या नोट: आधार पर दर्ज हुआ था मामला

मामले के अनुसार, कोटा थाना क्षेत्र में 17 मार्च 2019 को एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप था कि ग्राम पंचायत छतौना के सरपंच संतकुमार पैकरा ने 13-14 मार्च 2019 की रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। जांच में मिले कथित सुसाइड नोट में रेत घाट संचालन और पैसों के लेन-देन को लेकर प्रताड़ना एवं अपमान का जिक्र किया गया था। पुलिस जांच के बाद 14 अगस्त 2024 को अजय सिंह सहित आठ आरोपियों के खिलाफ धारा 306, 34 आईपीसी तथा एससी-एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत चार्जशीट पेश की गई थी।

मामले में प्रथमदृष्ट्या सामग्री मौजूद

डिवीजन बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सह आरोपी को पहचान संबंधी अस्पष्टता के आधार पर राहत दी थी, लेकिन वर्तमान मामले में अजय सिंह का नाम एफआईआर और सुसाइड नोट दोनों में दर्ज है। सुसाइड नोट में रेत घाट और आर्थिक लेन-देन से जुड़े लोगों का उल्लेख किया गया है, जिससे प्रथमदृष्ट्या याचिकाकर्ता का संबंध सामने आता है। कोर्ट ने यह भी माना कि ट्रायल काफी आगे बढ़ चुका है और छह गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। ऐसे में कार्यवाही रद्द करना न्यायहित में नहीं होगा।

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