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आयुर्वेद महाविद्यालय चिकित्सालय का वनौषधि उद्यान बेहाल

आयुर्वेद महाविद्यालय चिकित्सालय में यूं तो मेडिकल छात्रों के प्रैक्टिकल के लिए वनौषधि उद्यान बनाया गया है, पर यह महज नाम का साबित हो रहा है। वर्तमान में यहां औषधीय पौधों की जगह गाजर घास उग आई हैं। ऐसे में बीएएमएस के छात्रों का प्रेक्टिकल प्रभावित हो रहा है।

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नाम का गार्डन, औषधीय पौधों की जगी उग आए गाजर घांस

प्रैक्टिकल के लिए छात्रों को हो रही परेशानी

बिलासपुर. आयुर्वेद महाविद्यालय चिकित्सालय में यूं तो मेडिकल छात्रों के प्रैक्टिकल के लिए वनौषधि उद्यान बनाया गया है, पर यह महज नाम का साबित हो रहा है। वर्तमान में यहां औषधीय पौधों की जगह गाजर घास उग आई हैं। ऐसे में बीएएमएस के छात्रों का प्रेक्टिकल प्रभावित हो रहा है।
आयुर्वेद का नाता पेड़-पौधों, जड़ी-बूटियों से है, लेकिन महाविद्यालय प्रबंधन इस ओर ही ध्यान नहीं दे पा रहा है। बतादें कि करीब पांच साल पहले नूतन चौक के पास स्थित आयुर्वेद महाविद्यालय चिकित्सालय बिल्डिंग के बगल से एक एरिया में वनौषधि उद्यान स्थापित किया गया था। उस समय गार्डन स्थापित करने व उसमें औषधीय पौधों को रोपने हजारों रूपए खर्च आए थे। माना जा रहा था कि इसका क्रमश: विकास होगा, जिससे छात्रों को प्रेक्टिकल करना आसाना होगा, पर ऐसा नहीं हुआ। कुछ दिन तो पौधे हरेभरे नजर आए, पर देखरेख न होने से सब सूख गए। वर्तमान में यहां नीम समेत कुछ बड़े झाड़ तो हैं, पर औषधीय पौधे गायब हें। उनकी जगह गाजर घास उग आई है। ऐसे में छात्रों की लगातार मांग के बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लिहाजा छात्र पौधों को पढ़ कर पहचानने मजबूर हैं।
225 छात्र अध्ययनरत
बीएएमएस में 225 छात्र अध्ययनरत हैं। छात्रों के मुताबिक साढ़े 4 वर्षीय कोर्स के हर सेमेस्टर में औषधीय पौधों के वर्गीकरण का विषय है। इसके लिए पौधों को वास्तविक रूप से पहचानना जरूरी है। गार्डन में पौधे ही न होने से किताबों में पढ़ की ही ज्ञान ले रहे हैं। फैकल्टी टीचर्स का भी यही कहना है कि छात्रों को प्रायोगिक रूप से पढ़ानें औषधीय पौधों को होना बेहद जरूरी है, ताकि स्टेडेंट्स देख-समझ कर उसका बारीकी से अध्ययन करते हुए उसके गुण-दोष की पहचान कर सके, पर पौधे उपलब्ध न होने से उन्हें भी पढ़ाने मे ंपरेशानी हो रही है। वैकल्पिक रूप से किताबों व इंटरनेट के माध्यम से पढ़ाई कराई जा रही है।
मेंटेनेंस पर ध्यान नहीं
आयुर्वेद चिकित्सालय स्थिति इस उद्यान का सही तरीके से मेंटेनेंस न हो पाने की वजह से ही लगाए गए पौधे सूख गए। इसके बाद भी दूसरे पौधे लगाने पहल नहीं की जा रही है। यही वजह है कि स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है।

बजट न मिलने से उद्यान का विकास नहीं हो पा रहा है। फिर भी इसे संवारने कोशिश की जाएगी।
डॉ. रक्षपाल गुप्ता, निरीक्षक आयुर्वेद चिकित्सालय महाविद्यालय।

IMAGE CREDIT: patrika bilaspur
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