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बेमियादी हड़ताल: कर्मचारियों की हड़ताल से निपटने स्वास्थ्य विभाग लेगा अब आयुष्मान योजना का सहारा

बिलासपुर. वेतन विसंगति, नियमितीकरण समेत 24 सूत्रीय मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर स्वास्थ्य कर्मचारियों ने मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दिया। इसकी वजह से दूसरे दिन भी सिम्स, जिला अस्पताल समेत जिले भर से प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष रूप से जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई।

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Indefinite strike: Health department will now resort to Ayushman Yojan

Indefinite strike: Health department will now resort to Ayushman Yojan

मरीजों को खून व यूरिन जांच से लेकर एक्सरे, सीटी स्कैन समेत अन्य जांचों के लिए निजी पैथोलैब भटकना पड़ा। इधर स्वास्थ्य विभाग ने आंदोलनकारियों से निपटने आयुष्मान योजना का सहारा लेने का निर्णय लिया है। इस वैकल्पिक व्यवस्था के तहत मरीजों को आयुष्मान योजना के अंतर्गत ऐसे निजी अस्पतालों में रेफर किया जाएगा, जहां इस योजना के अंतर्गत इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल के समर्थन में अब धीरे-धीरे अन्य विभागों के कर्मचारी भी जुटते जा रहे हैं। हड़ताल के दूसरे दिन बुधवार को जिले के नियमित व संविदा ,एनएचएम के संविदा कर्मचारी, टीबी, कुष्ठ रोग विभाग के कर्मचारी, जीवन दीप समिति के कर्मचारियों ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए धरना स्थल नेहरू चौक में जुटे। इनकी हड़ताल से सिम्स व जिला चिकित्सालय में एक्सरे ,पैथोलॉजी, सोनोग्राफी, सीटी स्कैन, एमआरआई की केवल आपातकालीन सेवाएं ही चालू रहीं बाकी मरीजों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इधर मेजर ऑपरेशन, सर्जरी भी कर्मचारियों के अभाव में बंद रहे। इसी तरह सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी जांच प्रक्रिया प्रभावित रही। ऐसे में जिन मरीजों को डॉक्टरों से किसी प्रकार की जांच के लिए भेजा, उन्हें बाहर जांच कराना पड़ा। इससे ज्यादातर मरीजों का इलाज प्रभावित हुआ। तबीयत के मद्देनजर बहुत से मरीजों ने बाहर जाकर जांच कराया, लेकिन उन्हें वहां अस्पताला की तुलना में दो से तीन गुना ज्यादा शुल्क भुगतान करना पड़ा। बतादें कि सिम्स में हर रोज 1200 मरीजों का ब्लड टेस्ट व 300 से ज्यादा अन्य जांच होता है। इसी तरह जिला अस्पताल में करीब 700 मरीजों का ब्लड टेस्ट व 150 से ज्यादा अन्य जांच होती है। इमरजेंसी केसेज छोड़ ज्यादातर मरीजों को बाहर जांच कराना पड़ा। बहुत से मरीजों ने तो हड़ताल खत्म होने की आस में जांच को ही टाल दिया है।

0 इमरजेंसी सेवा ही हो रही जिला अध्यक्ष प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ अमरू साहू ने बताया कि हड़ताल से गंभीर मरीज प्रभावित न हों इस लिहाज से छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने हड़ताल के दौरान इमरजेंसी जांच के लिए कुछ कर्मचारियों को ड्यूटी करने की छूट दी है। जिससे सीरियस मरीजों का इलाज प्रभावित न हो। इएस प्रकार बुधवार को इमरजेंसी मरीजों की ही जांच हो पाई, बाकी मरीजों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

0 आयुष्मान योजना का सहारा लेने कवायद स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की बेमियादी हड़ताल के मद्देनजर अब सीएमएचओ डॉ. राजेश शुक्ला ने आयुष्मान योजना का सहारा लेने का विकल्प बनाया है। यानी अब मरीजों को आयुष्मान कार्ड के माध्यम से ऐसे निजी अस्पतालों में रेफर किया जाएगा, जहां इस योजना के तहत इलाज हो रहा है। इस लेकर सिम्स के एमएस डॉ. नीरज शेंडे ने भी सहमति ले ली है। इससे मरीजों को काफी हद तक इलाज के लिए भटकने से मुक्ति मिलेगी।

0 मुख्य रूप से ये जांच प्रक्रिया प्रभावित -सेंट्रल लैब पैथोलॉजी- हीमोग्लोबिन, सम्पूर्ण ब्लड सेल जांच, ई.एस.आर., ब्लड ग्रुप, परिफेरल स्मीयर, मलेरिया, यूरिन रूटीन माइक्रोस्कोपी जैसे महत्वपूर्ण जांच प्रभावित रहे। पहले- एक दिन में 1200 जांच होता था आज 500 नही हो पाया है। -पैथोलॉजी कॉलेज- हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच जो कि मरीजों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है, जिसमे कैंसर जैसे कारणों व बीमारी का पता चलता है पूर्णत: बंद रहा। -फोरेंसिक हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच जो पोस्टमार्टम के विसरा जांच के लिए महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से आपराधिक प्रकरण की भी जांच की जाती है। समस्त जांच पूर्णत: बंद रहा। - साइटोपैथोलॉजी जांच नहीं हो सकी। -कॉलेज में एमबीबीएस के स्टूडेंट की पढ़ाई के लिए प्रायोगिक क्लासेस बंद रहे। -पोस्ट मॉर्टम जांच बंद रहा। -मेडिकल कॉलेज की स्थापना से लेकर समस्त विभाग के कार्यालय बंद रहे। -एक्सरे, सीटी स्कैन, सोनोग्राफी की इमरजेंसी जांच ही हो सकी।

आपातकाल में इतनी ही हो पाई जांच सिम्स में रेडियोलॉजी जांच जो हर रोज औसतन 45 होती थी, बुधवार को 3 ही हो सकी। इसी तरह एमआरआई प्रतिदिन औसतन 10 होती है, 2 मरीजों का ही हुआ। एक्सरे हर रोज 200 होता है, 65 ही हो पाया। दूसरी ओर जिला अस्पताल में एक्सरे ,पैथोलॉजी जांच बंद रही।
0 मांग पूरी न होने तक आंदोलन की चेतावनी छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष रविंद्र तिवारी ने धरना प्रदर्शन में कहा कि स्वास्थ कर्मचारियों की मांग की लगातार अनदेखी हो रही है। यही वजह है कि इस बार आरपार की लड़ाई लड़ी जा रही है। जब तक मांग पूरी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष अमरू साहू संभागीय अध्यक्ष बिलासपुर विकास यादव, सोहन लाल कुंभकार, विनायक चंद्रवाशी, सुनील सोनी, देवेंद्र बंजारा सहित बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मचारी शामिल थे।

0 जब प्रेग्नेंट महिला को बिना जांच कराए लौटना पड़ा बुधवार को एक प्रेग्नेंट महिला को ब्लड व यूरिज जांच के लिउ डॉक्टर ने लिखा। जब वह पैथोलैब गई तो उसे यह कह कर चलता कर दिया गया कि कर्मचारी हड़ताल पर हैं। जांच नहीं हो पाएगी। काफी गिड़गिड़ाने के बाद भी उसकी एक नहीं सुनी गई और अंतत: उसे बिना इलाज ही लौटना पड़ा।

वर्जन...1 स्वास्थ्य कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के मद्देनजर आयुष्मान कार्ड के माध्यम से मरीजों को सरकारी अस्पतालों से निजी अस्पतालों में रेफर करने की योजना बना ली गई है। इससे मरीजों का इलाज प्रभावित नहीं होगा। डॉ. राजेश शुक्ला, सीएमएचओ बिलासपुर।

वर्जन...2 जरूरत पड़ी तो आयुष्मान योजना के माध्यम से मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर किया जाएगा। इस संबंध में सीएमएचओ से चर्चा हो गई है। डॉ. नीरज शेंडे, एमएस सिम्स।