
बिलासपुर. Today International girls day : एक जमाना था, जब बालिकाओं की पढ़ाई पर ज्यादा जोर नहीं दिया जाता था। घरेलू कामकाज में निपुणता ही उसकी योग्यता का पैमाना होता था, लेकिन आज लोगों की सोच का दायरा तेजी से बदल रहा है। गरीब से गरीब तबके के लोग भी अब अपनी बेटियों को पढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। यही वजह है कि बिलासपुर जिले में साक्षरता दर तेजी से बढ़ रहा है। इसका प्रमाण बोर्ड परीक्षाओं के रिजल्ट में देखा जा सकता है, जिसमें बालकों की तुलना में बालिकाओं का ग्राफ आगे रहता है।
Today International girls day : जिले में दो दशक के दौरान महिला साक्षरता दर में लगभग 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। छत्तीसगढ़ सांख्यिकी विभाग के मुताबिक वर्ष 2001 में जिले में 52.87 प्रतिशत महिलाएं साक्षर थीं, जो 2023 में बढ़ कर 71 प्रतिशत से अधिक हो गई है। बाल विवाह भी धीरे-धीरे समाप्त हो रहे हैं। इस ओर भी लोग जागरूक हो रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में एक अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2022 तक पूरे प्रदेश से बाल विवाह के कुल 383 मामले सामने आए। इनमें 379 मामलों में कार्रवाई करते हुए विवाह को रोका गया था। पिछले 4 वर्षों में 1 हजार 720 बाल विवाह रोकने में सफलता पाई है।
वर्कफोर्स में पार्टिसिपेशन अब भी कम...
सांख्यिकी विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2001 में राज्य में कुल विमेंस वर्कफोर्स पार्टिसिपेशन 40त्न था। इसमें गिरावट आते हुए वर्ष 2023 में यह आंकड़ा 39त्न हो गया है। यह डेटा दर्शाता है कि पिछले 23 साल में महिलाओं का वर्कफोर्स कम हुआ है। जिले में रोजगार पंजीयन धारकों में भी केवल 35.13त्न ही महिलाएं हैं।
बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ रहीं पलक
शहर के कई एनजीएओ गर्लस चाइल्ड राइट्स के लिए काम कर रहे हैं। इन्ही में से एक पलक जायसवाल एनजीओ के माध्यम से बालिकाओं को शिक्षित कर रही हैं। पिछले 8 साल में वो 1 हजार से अधिक बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ चुकी हैं। 'एकांकीया' नाम के प्रोग्राम के जरिए पलक गर्ल चाइल्ड प्लांटेशन का काम कर रहीं। है। पैदा हुई हर एक गर्ल चाइल्ड के लिए उनके परिवार को पौधों का वितरण कर रहीं। ताकि परिजन उस पौधे की उसी प्रकार देखभाल करे, जैसे अपनी बच्ची का करेंगे।
बालिकाओं को संवारने के लिए मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस...
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बालिका दिवस मनाने की पहल एक गैर-सरकारी संगठन 'प्लान इंटरनेशनल' प्रोजेक्ट के रूप में की गई थी। इस संगठन ने 'क्योंकि मैं एक लड़की हूं' नाम से एक अभियान की भी शुरुआत की थी। इसके बाद इस अभियान को इंटरनेशनल लेवल पर विस्तार करने के लिए कनाडा सरकार से संपर्क किया। कनाडा सरकार ने 55वें आम सभा में इस प्रस्ताव को रखा, जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने 19 दिसंबर, 2011 को इस प्रस्ताव को पारित किया और इसके लिए 11 अक्टूबर का दिन चुना। पहला अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 11 अक्टूबर, 2012 को मनाया गया था। इस तरह बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए यह दिवस मनाया जाता है। इस साल "लड़कियों के अधिकारों में निवेश: हमारा नेतृत्व, हमारा कल्याण" की थीम के साथ अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जा रहा है।
बेटी और बेटों में फर्क करना मूर्खता....
आज के सामाजिक परिदृश्य में बेटी और बेटों में फर्क करना मूर्खता है। लड़कियां कई मामलों में लड़कों से बेहतर हैं। हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं। - दीपा दुबे, कोनी
बच्चियों को करें सपोर्ट...
बेटियां अनमोल हैं। मैंने कभी अपने बेटे और बेटी में फर्क नहीं किया। अगर हमें एक शिक्षित समाज का निर्माण करना है तो बच्चियों की पढ़ाई में उनका सपोर्ट करना होगा। - पूजा द्विवेदी, राजकिशोर नगर, बिलासपुर
Published on:
11 Oct 2023 12:56 pm
बड़ी खबरें
View Allबिलासपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
