
जिले के 33 गोठानों में ही महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क बन पाया, वह भी आधा-अधूरा
शरद त्रिपाठी
बिलासपुर. जिले में 335 गोठान हैं, जिन्हें महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क के रूप में विकसित करना है। ताकि स्वदेशी वस्तुओं का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो और ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को स्व-सहायता समूह के माध्यम से स्व-रोजगार मिले। लेकिन अभी तक महज 33 गोठानों को ही इसके दायरे में लाया गया है। इधर जिला व जनपद पंचायत के सदस्यों को बढ़ा हुआ मानदेय देने में कोई कोताही नहीं बरती गई। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य शासन की इस महत्वपूर्ण योजना को लेकर जिला पंचायत पंचायत कितना गंभीर है।
छत्तीसगढ़ सरकार गरुआ, घुरबा, बारी योजना को लेकर गंभीर है। इस दिशा में बढ़चढ़ कर काम भी हो रहे हैं। इसी मद्देनजर पिछले बजट में गोठानों को महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क के रूप में विकसित करने शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत जिले के सभी 335 गोठानों का विकास होना है। इस योजना को लेकर जिला पंचायत ने प्रथम चरण में 65 गोठानों का चयन किया, इसमें अभी तक महज 33 गोठानों में ही काम शुरू हो पाया है। वह भी आधा-अधूरा। जबकि सीएम भूपेश बघेल ने इसे प्राथमिकता से शुरू करने कहा है। दरअसल चयनित गोठानों में बाकायदा शेड लगाने के साथ ही बिजली, पानी की व्यवस्था करनी है। साथ ही कृषि व हार्टीकल्चर उत्पादों को लेकर प्रोडक्ट्स निर्माण करना है। जिन गोठानों में अभी काम शुरू हुआ है, वहां अभी महज मशाला बनाने की मशीन ही उपलब्ध कराई गई है। जबकि वहां मिनी राइस मिल, अचार, पापड़ उद्योग के लिए भी मशीन देनी है। इसके अलावा मशरूप उत्पादन, साबुन, अगरबत्ती बनाने की मशीनें भी उपलब्ध करानी हैं, जो अभी तक इन गोठानों को नहीं मिल पाई हैं।
मछली व बतख पालन भी
इन गोठानों में योजना अंतर्गत मछली व बतख पालन भी करना है, जिससे अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाओं को वहां रोजगार मिल सके, पर यह भी अभी दूर की कौड़ी साबित हो रही है। इस पर कब अमल होगा, यह संबंधित अधिकारियों को भी नहीं पता।
गोठान प्रॉडक्ट्स का भी प्रचार-प्रसार नहीं
गोठानों में निर्मित उत्पाद को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। वर्तमान में सी-मार्ट के जरिए कुछ प्रॉडक्ट्स को जरूर बेचा जा रहा है, पर यहां ग्राहकों का जितना रुझान होना चाहिए, नहीं है। इसका मुख्य कारण समुचित प्रचार-प्रसार न होना है। इसका दायित्व जिला प्रशासन पर है, पर इस पर कोई पहल नहीं हो रही है। वर्तमान में सामान खपाने के लिए आंगनबाड़ी सरकारी स्कूलों, छात्रावासों पर जरूर दबाव बनाया जा रहा है।
-जिले के समस्त गोठानों को महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क के रूप में विकसित करना है। प्रथम चरण में 65 ग्रामीण क्षेत्र के गोठानों का चयन किया गया है। इसमें 33 में ही काम शुरू हो पाया है। क्रमश: अन्य गोठानों का भी विकास होगा। गोठानों में निर्मित प्रॉडक्ट्स के प्रचार-प्रसार पर भी ध्यान दिया जाएगा।
अजीत वर्मा, नोडल अधिकारी महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क।
----------
Published on:
19 Aug 2022 02:01 am

बड़ी खबरें
View Allबिलासपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
