पांडेय का आरोप है कि सिम्स द्वारा 8 नवंबर 2016 के विज्ञापन में फार्माकोलॉजी के प्रोफेसर पद के लिए आवेदन मंगाए गए थे। इस पद के लिए डॉ. भानू प्रकाश, प्रोफेसर फार्माकोलॉजी द्वारा आवेदन दिया गया था। इस संबंध में वे स्वयं डीन से भी मिले थे, पर आज तक नियुक्तिपर कोई विचार नहीं किया गया। इस प्रकार सिम्स में भेदभावपूर्ण तथा भ्रष्टाचारपूर्वक संविदा नियुक्ति की जाती है, जिससे प्रतीत होता है कि लाखों रुपए की रिश्वत ली गई। जबकि एक अन्य मामले में डॉ. विजय कुमार सुकूल जो कि एमसीआई एवं शासन की निर्धारित शैक्षणिक अनुभव एवं अहर्ता नहीं रखते, इन्हें सहप्राध्यापक के पद पर 16 दिसंबर 2016 को नियुक्तिदे दी गई एवं संविदा नियुक्तिआदेश भी जारी कर दिए गए। इतना ही नहीं पदभार भी ग्रहण करा दिया गया। जबकि 16 दिसंबर को ही एमसीआई का निरीक्षण होना था। इस पद को एमसीआई द्वारा स्वीकृति नहीं दी गई थी।