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सिम्स में चिकित्सा शिक्षकों की भर्ती मामले में गड़बड़

डीन से 1 करोड़ 2 लाख 32 हजार की रिकवरी की मांग

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Kajal Kiran Kashyap

Jun 30, 2017

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बिलासपुर.
सरकंडा लोधीपारा निवासी अधिवक्ता आर के पांडेय ने सिम्स में चिकित्सा शिक्षकों की भर्ती मामले में फर्जीवाड़े की शिकायत स्वास्थ्य मंत्री से की है। सूचना के अधिकार के तहत इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ है।


शिकायतकार्ता ने डीन पर अपने चहेतों को भर्ती कर उपकृत करने का आरोप लगाते हुए इन शिक्षकों को वेतन के रूप में दी गई 1 करोड़ से अधिक की राशि की रिकवरी करने की मांग की है। जांच प्रक्रिया पूरी होने तक डीन के स्थानांतरण की भी मांग की गई है, ताकि जांच प्रक्रिया बाधित न हो।


अधिवक्ता पांडेय ने स्वास्थ्य मंत्री से की गई शिकायत में सिम्स के डीन पर अतिशेष अनियमित नियुक्तियों (संविदा) की पुष्टि शासन एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग से नहीं कराने का आरोप लगाया है। कहा गया है कि 19 अगस्त 2013 की कंडिका 2 के अनुसार इन नियुक्तियों की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग से अनिवार्य है।


जबकि इस मामले में ऐसा नहीं किया गया है। यह पूर्णतया अवैधानिक एवं आर्थिक अपराध है। इसलिए चिकित्सा शिक्षकों को वेतन के रूप में दी गई 1 करोड़ 2 लाख 32 हजार की राशि डीन विष्णुदत्त के वेतन से वसूल की जाए। पांडेय ने मामले की जांच उच्च स्तरीय कमेटी से कराने तथा जांच होने तक डीन को अन्य संस्थान में स्थानांतरित किए जाने की मांग की है।


फार्माकोलॉजी डॉ. भानू के आवेदन पर विचार नहीं:
पांडेय का आरोप है कि सिम्स द्वारा 8 नवंबर 2016 के विज्ञापन में फार्माकोलॉजी के प्रोफेसर पद के लिए आवेदन मंगाए गए थे। इस पद के लिए डॉ. भानू प्रकाश, प्रोफेसर फार्माकोलॉजी द्वारा आवेदन दिया गया था। इस संबंध में वे स्वयं डीन से भी मिले थे, पर आज तक नियुक्तिपर कोई विचार नहीं किया गया। इस प्रकार सिम्स में भेदभावपूर्ण तथा भ्रष्टाचारपूर्वक संविदा नियुक्ति की जाती है, जिससे प्रतीत होता है कि लाखों रुपए की रिश्वत ली गई। जबकि एक अन्य मामले में डॉ. विजय कुमार सुकूल जो कि एमसीआई एवं शासन की निर्धारित शैक्षणिक अनुभव एवं अहर्ता नहीं रखते, इन्हें सहप्राध्यापक के पद पर 16 दिसंबर 2016 को नियुक्तिदे दी गई एवं संविदा नियुक्तिआदेश भी जारी कर दिए गए। इतना ही नहीं पदभार भी ग्रहण करा दिया गया। जबकि 16 दिसंबर को ही एमसीआई का निरीक्षण होना था। इस पद को एमसीआई द्वारा स्वीकृति नहीं दी गई थी।


न्यूरोसर्जन व स्त्री रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति अवैध:
अधिवक्ता पांडेय ने आरोप लगाया है कि सिम्स में ट्रामा यूनिट प्रारंभ नहीं की गई है ना ही न्यूरोसर्जरी का सुपर स्पेशियलिटी विभाग अलग से बनाया गया है। इसके बावजूद न्यूरोसर्जरी सहायक प्राध्यापक डॉ. एके येन्डे को बार-बार सेवावृद्धि दी गई है एवं 90 हजार का वेतन दिया जा रहा है। डॉ. सोनल मिश्रा, स्त्री रोग विभाग (ओबीजी) को पद न रहते हुए भी नियुक्ति दी गई है। इनका वेतन आहरण टीबी चेस्ट के एसआर के विरुद्ध किया जा रहा है। जबकि डा. मिश्रा टीबी चेस्ट की योग्यता नहीं रखती हैं।


प्राध्यापक
एवं सह-प्राध्यापक के रिक्तपद एमसीआई के मापदंड के अनुसार भरे गए हैं। डीन को इसके अधिकार दिए गए हैं। हालांकि इन शिक्षकों को अन्य पद के विरुद्ध वेतन दिया जा रहा है, जो अतिशेष की श्रेणी में आते हैं। शासन से इस संबंध में दिशा-निर्देश भी मिले हैं तथा स्वास्थ्य सचिव को इस संबध में सूचित भी कर दिया गया है।

- डॉ. विष्णु दत्त,
डीन, सिम्स