
Patients upset due to non-availability of senior doctors in the ward f
समुचित इलाज न मिल पाने से कई मरीजों को निधारित समय से पहले ही बेड छोड़ जाना पड़ रहा है। संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सिम्स में रोजाना औसतन डेढ़ हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इसके अलावा 800 से ज्यादा मरीज विभिन्न वार्डों में भर्ती रहते हैं। पत्रिका टीम ने सभी वार्डों का भ्रमण कर देखा, ज्यादातर वार्डों में मरीजों की यही समस्या मिली कि उनका रूटीन चेकअप प्रॉपर नहीं हो रहा है। क्यों कि उनके फॉलोअप चेकअप के लिए कोई नियमित रूप से सीनियर डॉक्टर ही नहीं पहुंच रहे हैं। वार्ड में उनका इलाज प्रशिक्ष डॉक्टरों या फिर नर्सिंग स्टॉफ के भरोसे है। यही वजह है कि उनका यहां समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है।
0 बड़े डॉक्टरों के आने का हवाला वार्डों में भर्ती मरीजों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जूनियर डॉक्टर उनके रूटीन चेकअप के नाम पर जरूर आते हैं, पर कोई संबंधित शारीरिक परेशानी बताने पर बड़े डॉक्टर देखेंगे कहते हुए चलते बनते हैं। इससे उनका उलाज प्रभावित हो रहा है। यही वजह है कि बहुत से ऐसे मरीज जिनकी हालत खराब हो जाती है, परेशान होकर उन्हें यहां से स्वयं भाग कर दूसरे अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।
0 रात में तो नर्सिंग स्टॉफ भी नहीं सुनता ज्यादातर मरीजों का आरोप है कि दिन में तो एक बार प्रशिक्षु डॉक्टर आकर औपचारिकता पूरी कर लेते हैं, पर रात में तो कोई झांकने तक नहीं आता। स्थिति ये है कि नर्सिंग स्टॉफ भी नहीं सुनता। स्टॉफ अपने रूम में सो जाता है, फिर कोई मरीज कितना भी चिल्लाता रहे, कोई नहीं सुनता। परेशानी बढऩे पर ज्यादा शोर मचाने पर अगर कोई स्टॉफ उठ गया तो उसके गुस्से का सामना मरीज व उनके परिजनों को भुगतना पड़ता है।
वर्जन... अभी तक मेरे पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। सीनियर डॉक्टर्स दिन में एक बार जा रहे हैं। फिर भी अगर ऐसी अनियमितता है तो पता लगा कर उसे ठीक किया जाएगा। डॉ. नीरज शेंडे, एमएस सिम्स
Published on:
30 Jun 2023 12:47 am

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