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सरकारी कर्मचारियों के तबादले के बाद रिलीविंग नहीं रोक सकते, बिलासपुर हाईकोर्ट का फैसला

Bilaspur High court: कोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी का स्थानांतरण हो गया है तो विभाग आदिवासी क्षेत्र में विकल्प नहीं मिलने का बहाना बनाकर उसकी रिलीविंग नहीं रोक सकता
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Chhattisgarh Bilaspur High court

हाईकोई ने कहा-तबादले के बाद रिलीविंग नहीं रोक सकते ( Photo - Patrika )

Chhattisgarh High court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के तबादलों और उनकी रिलीविंग को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी का स्थानांतरण हो गया है तो विभाग आदिवासी क्षेत्र में विकल्प नहीं मिलने का बहाना बनाकर उसकी रिलीविंग नहीं रोक सकता। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 20 दिनों के भीतर कार्यमुक्त करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है।

Bilaspur High court: तबादले के बाद भी कार्यमुक्त नहीं किया

बस्तर नारायणपुर जिले में पदस्थ चंद्रशेखर मंडावी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि वर्तमान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ओरछा (नारायणपुर) में रेडियोग्राफर के पद पर कार्यरत है। उसका तबादला 26 जून 2025 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, आमाबेड़ा (कांकेर) किया गया था। आदेश जारी होने के एक साल बाद भी विभाग उसे कार्यमुक्त नहीं कर रहा है जिसके चलते वह नई जगह पर ज्वाइन नहीं कर पा रहा है।

कोर्ट ने कही ये बड़ी बात

जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने सुनवाई के बाद कहा कि सर्कुलर के अनुसार रिलीविंग पर रोक केवल तब लागू होती है, जब किसी कर्मचारी का तबादला अनुसूचित क्षेत्र से गैर-अनुसूचित क्षेत्र में किया जा रहा हो। (Bilaspur High court) याचिकाकर्ता का ट्रांसफर ओरछा (नारायणपुर) से आमाबेड़ा (कांकेर) हुआ है, और यह दोनों ही स्थान छत्तीसगढ़ के अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। इसलिए विभाग इस नियम की गलत व्याख्या करके कर्मचारी को रोक नहीं सकता।

शासन का तर्क-दूसरा कर्मचारी नहीं मिल रहा

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अधिवक्ता ने 7 जनवरी 2026 को जारी सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को इसलिए रिलीव नहीं किया गया क्योंकि उनकी जगह पर अभी तक कोई दूसरा कर्मचारी नहीं आया है। शासन के मुताबिक, नीति यह है कि अनुसूचित क्षेत्र के पदों को खाली नहीं छोड़ा जा सकता।

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