
आयुष्मान योजना से दांत के इलाज का पैकेज हटाया
बिलासपुर. आयुष्मान योजना के तहत अब दांतों का इलाज नहीं होगा। योजना के तहत दांत रोगों का पैकेज सॉफ्टवेयर से हटा दिया गया। इसकी जानकारी भी दंत रोग विशेषज्ञों को नहीं दी गई। पैकेज हटने की जानकारी डॉक्टरों को एक दूसरे के मैसेज से पता चली। इससे डेंटल क्लीनिकों पर डॉक्टर व इलाज कराने आए मरीजों को बीच विवाद भी होता रहा। डेंटल एसोसिएशन द्वारा रविवार को दोपहर बैठक की गई है। सभी डाक्टर सोमवार को छग भवन में स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात करेंगे।
छत्तीसगढ़ में आयुष्मान योजना के तहत दांतों का इलाज नहीं होगा। इसकी जानकारी मिलते ही दंत रोग विशेषज्ञों के बीच हलचल मच गई है। दंत रोग चिकित्सकों का कहना है कि इलाज बंद करने का कारण पता नहीं चल रहा है। इस आशय की जानकारी मिलने के बाद सभी चिकित्सक हैरान हैं। इस मामले को लेकर रविवार को दोपहर दो बजे होटल रिगल में दंत रोग विशेषज्ञों की एक बैठक हुई। डाक्टरों ने इस मामले में सोमवार को छग भवन में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव से मुलाकात कर चर्चा करने का निर्णय लिया है। छग दंत रोग विशेषज्ञ डॉ.
आशीष सोनी ने बताया जिले में लगभग 50 अस्पताल आयुष्मान योजना के पैकेज से दांत का इलाज कर रहे थे। हर महीने एक अस्पताल में लगभग 25 मरीज आते हैं। उन्होंने बताया हर महीने सभी अस्पताल को मिलाकर लगभग ढ़ाई लाख मरीज आते हैं। अचानक इस योजना को बंद करने से डॉक्टर भी हैरान हैं। डॉक्टर आशीष ने बताया छग में सबसे ज्यादा अधिक दांत व मुंह के बीमारियों के मरीज आते हैं। यह योजना प्रदेश में सुचारु रूप से चल रही थी। ऐसे में अचानक इस योजना से दांत के बीमारियों का इलाज को अलग कर देने से मरीज प्रभावित होंगे। इसके अलावा जिन लोगों को अस्पताल में कम्प्यूटर आपरेटर और अटेंडर का काम मिला था उनकी भी नौकरी चली जाएगी। अचानक इसे हटाए जाने से मरीज डाक्टरों के विवाद कर रहे हैं। डॉ. सोनी ने बताया दांत को इलाज करने के लिए मरीज को कम से कम तीन बार बुलाया जाता है। आज हमारे पास मरीज आए तो उनको बताया गया कि आयुष्मान योजना से इलाज बंद कर दिया गया है वे मानने के लिए तैयार नहीं हो रहे थे। कुछ लोगों से विवाद भी हो गया।
सरकारी अस्पतालों में नहीं है व्यवस्था
सिम्स के दंत रोग विभाग में तीन सर्जन है लेकिन वहां ओपीडी के बाद बाकी इलाज भगवान भरोसे होता है। दांतों में मसाला भरने से आपरेशन सहित अन्य कार्य नहीं हो पाता है। वे लोग सीधे निजी अस्पताल भेजते हैं। सिम्स के एक डॉक्टर कहना है दांतों के इलाज के पर्याप्त व्यवस्था नहीं है लेकिन इस आशय का आदेश नहीं आया है कि अब दांतों का इलाज निजी के बजाय सरकारी अस्पताल में ही किया जाएगा।
एक दिन पहले इलाज करने का आदेश मिला
आयुष्मान योजना के सीईओ श्रीकांत ने 15 नवम्बर को प्रदेश के सभी सीएमएचओ को पत्र लिखकर कहा कि आयुष्मान योजना के तहत इलाज जारी रखना है। 16 नवम्बर को सभी योजना के अंतर्गत समस्त क्लेम प्रोसेसिंग रेलीगेयर बीमा कंपनी एवं विडाल हेल्थ टीपीए द्वारा की जाएगी जिसका भुगतान राज्य नोडल एजेंसी छग द्वारा ट्रस्ट के रूप में किया जाएगा। साथ ही नई योजना के क्रियान्वयन के लिए दिशा निर्देश दिए जाएंगे।
आयुष्मान योजना के दंात के इलाज का पैकेज हटा दिया गया है। अचानक लिए गए निर्णय से सभी डॉक्टर हतप्रद हैं। सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात कर योजना से हटाने का कारण पूछा जाएगा और मरीजों के हित को ध्यान में रखकर इसे प्रारंभ करने की मांग की जाएगी।
डॉ. सुनील सोनी, अध्यक्ष, छग दंत चिकित्सक
आयुष्मान योजना से दांत रोग के इलाज का पैकेज को हटाने का आदेश नहीं मिला है। निजी डाक्टरों से जानकारी मिली है कि योजना के तहत पैकेज सॉफ्टवेयर से हटा दिया गया है।
डॉ. प्रमोद महाजन, सीएमएचओ, बिलासपुर
Updated on:
18 Nov 2019 12:55 pm
Published on:
18 Nov 2019 12:49 pm
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