Baby Care Tips: तेल मालिश से बढ़ता है मां और बच्चे का भावनात्मक जुड़ाव

Baby Care Tips: बच्चों की हड्डियों के अलावा मांसपेशियों की मजबूती और विकास के लिए केवल मां का दूध ही काफी नहीं। शरीर पर की जाने वाली तेल की मालिश अंदरुनी और बाहरी दोनों तरह से मजबूती देती है

Yuvraj Singh Jadon

September, 2005:21 PM

Baby Care Tips: बच्चों की हड्डियों के अलावा मांसपेशियों की मजबूती और विकास के लिए केवल मां का दूध ही काफी नहीं। शरीर पर की जाने वाली तेल की मालिश अंदरुनी और बाहरी दोनों तरह से मजबूती देती है। यह मालिश वैसे तो किसी भी मौसम में की जा सकती हैं लेकिन सर्दी के मौसम में यदि इसे की जाए तो बेहद फायदेमंद है। क्योंकि इस दौरान बच्चों की त्वचा शुष्क हो जाती है और हड्डियों को लचीला बने रहने के लिए अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है। जानते हैं कब ( When To Start baby massage ) और कैसे तेल मालिश करनी चाहिए ( How To Massage Baby ) :-

ये तेल उपयोगी ( Baby Massage Oil )
नारियल, सरसों, जैतून, तिल, बादाम, सूरजमुखी, केमोमाइल आदि के तेल बहूगुणी होते हैं। इसमें सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की संख्या भी अधिक होती है। इनके अलावा कुछ लोग देसी घी और मक्खन से भी मालिश करते हैं। क्योंकि इनमें एंटीबायोटिक, एंटीबैक्टीरियल और विटामिन-ई व ए जैसे गुण होते हैं जो त्वचा के रोमछिद्रों से होते हुए मांसपेशियों की ताकत बढ़ाते हैं।

कई तरह से है फायदेमंद ( Oil Massage Benefits For Baby )
तेल मालिश से जोड़ों की मजबूती के अलावा त्वचा में नमी बरकरार रहती है। इससे शरीर में लचीलापन आने के साथ एनर्जी भी आती है और प्रमुख हार्मोन सही तरह से रिलीज होते हैं। अलग-अलग तेलों में मौजूद एंटीबायोटिक, एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल और विटामिन-ई व ए जैसे गुण रोगों से बचाव कर रक्तसंचार बेहतर करने और अंगों की जरूरत को पूरा करने में मदद करते हैं। मालिश के दौरान बच्चे का मां से भावनात्मक जुड़ाव बेहतर होता है।

मालिश का तय करें सही समय ( Best Time For Oil Massage For Baby )
जन्म के बाद एक साल तक तेल से मालिश शरीर के विकास और हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी है। इसके अलावा इसे किसी भी उम्र में कर सकते हैं। खासकर बच्चों की तेल मालिश किसी भी समय कर सकते हैं बशर्ते बच्चा इसके लिए तैयार हो जैसे बच्चा खुश और शांत दिखे तो ही मालिश करें। उससे जबरदस्ती न करें और रोने के दौरान मालिश न करें। ठंडी हवा या खुले वातावरण के बजाय कमरे में 26 - 27 सेल्सियस तापमान यानी गर्म तापमान में करें। क्योंकि खुली हवा में मालिश से बच्चे को ठंड लग सकती है। जिससे निमोनिया की आशंका बढ़ जाती है।

धूप में करें मालिश
धूप में लिटाकर बच्चे की मालिश कर सकते हैं इससे उसे विटामिन-डी भी मिलेगा लेकिन यदि धूप में तेजी न हो। उसके रोने, चिड़चिड़ेपन, किसी रोग से पीडि़त होने या शारीरिक संरचना में गड़बड़ी होने पर मालिश करने से बचें। इस दौरान यदि वह हर बार रोए, त्वचा पर लाल दाने उभरें या परेशानी महसूस करे तो डॉक्टरी सलाह जरूर लें।

ध्यान रखें
मालिश के दौरान हल्के प्रेशर के हाथों से थोड़ा अधिक प्रेशर दें। इसके अलावा वातावरण के अनुरूप ही मालिश करें।

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युवराज सिंह
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