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Dental Treatment Tips: जानिए दांतों की कौनसी समस्या के लिए कहां दिखाएं

Dental Treatment Tips: Dental Care Tips: Dental Care: आइये जानते हैं डेंटल कॉलेज या अस्पाल में किस विभाग में कौनसे रोग का इलाज होता है।

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जयपुर

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Vikas Gupta

Jun 22, 2019

Dental

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Dental Treatment Tips:dental care Tips: Dental Care: ओरल हैल्थ (मुंह, दांत व मसूढ़ों) को लेकर अक्सर लोग लापरवाही बरतते हैं। कई मामलों में दांतों की किस समस्या के लिए कहां दिखाया जाएं ये मरीज को समझ ही नहीं आता। आइये जानते हैं डेंटल कॉलेज या अस्पाल में किस विभाग में कौनसे रोग का इलाज होता है।

1. ओपीडी : यहां दांतों की सामान्य दिक्कतें जैसे दांतदर्द, ठंडा-गर्म लगना, मसूढ़ों में सूजन आदि का इलाज किया जाता है। इस दौरान अगर डॉक्टर को लगता है कि मरीज को विशेष ट्रीटमेंट की जरूरत है या समस्या गंभीर है तो उसे इलाज के लिए सम्बंधित डिपार्टमेंट में भेजा जाता है।

2. ओरल सर्जरी : इसमें छोटे-बड़े जबड़े या हड्डियों के कारण चेहरे की विकृति या फ्रैक्चर होने पर जबड़े को जोड़ने व सुधारने जैसी सर्जरी करते हैं। इसके अलावा अक्ल दाढ़, खराब दांत को हटाने व ट्यूमर को बाहर निकालने की सर्जरी की जाती है।

3. एक्स रे-रेडियोलॉजी : दांत व जबड़ों की बीमारी व उसकी गंभीरता जानने के लिए ब्लड टैस्ट, एक्स-रे, सीबीसीटी जैसी जांचें की जाती हैं।

4. कंजर्वेटिव एंड एंडोडॉन्टिक्स : दांत-मसूढ़ों के रोग को शुरुआत में ही कंट्रोल कर लेते हैं। दांत में कीड़ा लगने या कैविटी होने पर दांत को पूरा निकालने की बजाय प्रभावित हिस्से को ठीक करने और सफाई व टूथ वाइटनिंग करते हैं। एंडोडॉन्टिक्स में रूट कैनाल ट्रीटमेंट करते हैं।

5. प्रोस्थेटिक्स : इसमें मुंह से जुड़े अंग जैसे दांत, जबड़ा, आंख, चेहरे की हड्डियां आदि को मरीज का नाप लेकर कृत्रिम रूप से तैयार कर प्रभावित जगह पर लगा देते हैं। जैसे एक्सीडेंट में जबड़ा टूटने पर प्रोस्थेटिक्स यानी कृत्रिम जबड़ा लगाना।

6. पीरियोडॉन्टिक्स : इस विभाग में मसूढ़ों से जुड़ी सभी तरह की दिक्कतों का इलाज करते हैं। जैसे मसूढ़ों में सूजन, संक्रमण, विकृति, खून आना, सड़न और इससे सम्बंधित सर्जरी के अलावा डेंटल इंप्लांट की देखरेख भी की जाती है।

7. पीडोडॉन्टिक्स : यहां 10 साल से कम उम्र के बच्चों की दांत व मसूढ़े संबंधी सभी समस्याओं का इलाज होता है। चाहे सर्जिकल हो या नॉन-सर्जिकल। ब्रेसेज से बचपन में ही दांतों को सही आकार देते हैं।

8. ऑर्थोडॉन्टिक्स : टेढ़े-मेढ़े दांतों व विकृत जबड़ों को ठीक करना, बाहर की ओर बढ़ने वाले दांतों में बे्रसेज लगाना, हड्डी में दांतों का फंसा रहना, स्माइल डिजाइनिंग का ट्रीटमेंट इस विभाग के तहत किया जाता है।