
औसतन तीन से चार घंटे का समय युवा इस पर बिता रहे हैं। मोबाइल फोन का उपयोग बढऩे से नई तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। नेत्ररोग विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल स्क्रीन पर एकटक देखने से आंखों का ब्लिंकिंग रेट घट जाता है। सामान्यत: आंखें प्रति मिनट 12 से 14 बार ब्लिंकिंग करती हैं, लेकिन मोबाइल स्क्रीन पर बने रहने से ब्लिंकिंग रेट छह से सात हो जाता है। इससे आंखों में ड्राइनेस बढ़ रही है और आंखें कमजोर हो रही हैं। इसे कंप्यूटर विजन सिंड्रोम कहते हैं। वहीं कम उम्र में स्मार्टफोन की लत की वजह बच्चे सामाजिक तौर पर विकसित नहीं हो पाते हैं। बाहर खेलने न जाने की वजह से उनके व्यक्तित्व का विकास नहीं हो पाता।
10 फीसदी प्रोफेशनल भी इस चपेट में
डॉक्टरों का कहना है कि 10 फीसदी प्रोफेशनल भी इस चपेट में है। ज्यादातर डॉक्टर आंखों को राहत देने के लिए लुब्रिकेंट उपयोग करने की सलाह दे रहे हैं। मोबाइल, डेस्कटॉप और लैपटाप का उपयोग करने वालों को हर 15 से 20 मिनट में आंखों को आराम देने की सलाह दे रहे हैं। आंखों पर दबाव बनने से आंखें लाल हो जाती है और पानी आने की समस्या भी देखने को मिल रही है।
आंखों को ऐसे दें आराम
आंखों को आराम देने के लिए 20-20 गेम खेल सकते हैं। 20 मिनट तक स्क्रीन पर फोकस करने के बाद 20 सेकंड के लिए नजर वहां से हटाएं और खुद से 20 फीट दूर पर स्थित किसी चीज पर फोकस करें या फिर हर 20 मिनट के बाद 20 बार पलकों को झपकाएं। काम के दौरान हर घंटे आंखों को 3-5 मिनट के लिए आराम दें। आंखें पास की चीजों पर फोकस करती हैं तो उन्हें ज्यादा काम करना पड़ता है। ऐसे में बीच-बीच में दूर की चीजों पर फोकस करना जरूरी है। आंखों को जल्दी-जल्दी खोलें और बंद करें। ऐसा 15 से 20 बार कर सकते हैं।
Published on:
06 Oct 2019 04:19 pm
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