सेहतमंद रहना है तो ऑफिस में ऐसे करें काम

सेहतमंद रहना है तो ऑफिस में ऐसे करें काम

Yuvraj Singh Jadon | Publish: Mar, 23 2019 04:36:38 PM (IST) | Updated: Mar, 23 2019 04:42:15 PM (IST) तन-मन

लंबे समय तक बैठने से रक्त के थक्के जम जाते हैं जो मस्तिष्क में पहुंचकर स्ट्रोक का सबब बन सकते हैं

 

कुछ समय पहले ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने उन लोगों के लिए चेतावनी जारी की थी जो लंबे समय तक लगातार बैठकर काम करते हैं। इन वैज्ञानिकों का कहना है कि एक ही मुद्रा में लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर के हर अंग को नुकसान पहुंचता है। आइए जानते हैं इसके बारे में :-

यूं 'बैठ' जाता है शरीर
सिर
: लंबे समय तक बैठने से रक्त के थक्के जम जाते हैं जो मस्तिष्क में पहुंचकर स्ट्रोक का सबब बन सकते हैं।

फेफड़े : दिनभर बैठे रहने से पल्मोनरी एम्बोलिज्म यानी फेफड़ों में रक्त के थक्के जमने की आशंका बढ़ने लगती है।

हाथ : घंटों बैठे रहने की वजह से इस अंग के सुन्न होने या हाई ब्लडप्रेशर का खतरा बढ़ जाता है।

पेट : बैठे रहने से मोटापा, कोलोन कैंसर आदि बीमारियों का खतरा रहता है। इससे रक्तधमनियों में वसा के जमाव को घटाने वाले एंजाइम ठप हो जाते हैं और शरीर की गतिविधि कमजोर पड़ने लगती है।

गर्दन : बैठे रहने से गर्दन की मांसपेशियों में दर्द होने की आशंका भी रहती है।

पांव : हमारे इस अंग में रक्त का संचालन सही न होने से सुन्नता और नसों में क्षति आदि के खतरे की आशंका बढ़ जाती है।

दिल : आलस्यपूर्ण एवं शारीरिक गतिविधि से विहीन जीवनशैली का दुष्परिणाम इंसान को हार्ट अटैक या डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों के रूप में भोगना पड़ सकता है।

पीठ : लगातार बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी पर जोर पड़ता है। इस वजह से रीढ़ की हड्डी में दर्द या इंजरी आ सकती है।

पैर : बैठे रहने से पैरों में तरल इकट्ठा हो जाता है। रात को जब हम सोते हैं तो यह गर्दन तक आ जाता है जिससे स्लीप एप्नीया यानी सोते समय सांस में रुकावट की समस्या होने लगती है। वहीं खड़े होने या इधर-उधर टहलते रहने से यह तरल शरीर में चारों ओर फैलता रहता है।

सावधानी बरतें
चिकित्सकों के मुताबिक अगर आप डेस्क जॉब पर हैं या बैठे-बैठे लंबे समय तक काम करते हैं तो दिनभर में तीन से चार घंटे खड़े रहने या टहलने का बहाना खोजें। ऑफिस में लगातार दो-तीन घंटे तक बैठकर काम करने के बाद पांच से दस मिनट के लिए टहल लें। ऑफिस में लिफ्ट के बजाय सीढ़ियाें का प्रयोग करें। कुर्सी पर बैठे- बैठे ही हाथों और पैरों को हिलाएं-डुलाएं ताकि रक्तका प्रवाह सुचारु रूप से बना रहे।

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