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सर्दी की धूप में होते हैं ये चमत्कारिक फायदे, नहीं चूके इस बार

एक्टिव रहने से हमारा शरीर फील गुड कैमिकल्स का स्त्राव करता है जो अवसाद जैसी भावना को कम करते हैं।

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Pawan Kumar Rana

Nov 25, 2017

अप्रैल ही झुलसा रहा है, मई-जून की गर्मी तो जलाने लगेगी

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मौसम बदलने के साथ ही कहीं आप मूडी तो नहीं हो गए हैं? यानी बात-बात पर गुस्सा होना, अचानक उदास हो जाना, चिड़चिड़ापन आदि तो आपके स्वभाव में शामिल नहीं हो गए हैं। अगर हां, तो ये मौसमी अवसाद के लक्षण हो सकते हैं। सर्दी के मौसम में सूरज की रोशनी कम होने पर 'सैड' यानी सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर की समस्या सामने आने लगती है। ऐसे में धूप लेना जरूरी है।

दिमाग पर बुरा असर
सैड एक प्रकार का डिप्रेशन या अवसाद है जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। इस दौरान काम में मन नहीं लगना व निराशा के भाव दिमाग में आते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में दिन छोटे और रात लंबी होने से हमारी गतिविधियों, बॉडी क्लॉक व सेहत पर भी असर पड़ता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह ज्यादा होता है। साथ ही जिन्हें अन्य तरह के अवसाद या बायपोलर डिप्रेशन होता है उनमें सैड की समस्या होने की ज्यादा आशंका होती है।

ये दिक्कतें होती हैं
सर्दियों में दिमाग का कार्य अधिक होने से मूड व सोने के पैटर्न को नियंत्रित करने वाला मेलाटोनिन हार्मोन असंतुलित हो जाता है जो अवसाद का मुख्य कारण है। वहीं सेरोटॉनिन न्यूरोट्रांसमीटर का काम करता है। जो सूर्य की रोशनी में ही सक्रिय होता है। लेकिन सर्दियों में सूरज की रोशनी कम होने से यह रसायन कम सक्रिय होता है जिससे लोगों में अवसाद बढ़ऩे लगता है। धूप की किरणें लेने से दिमाग का हाइपोथैलेमस हिस्सा उत्तेजित होने से नींद, मूड व हमारी भावनाएं नियंत्रित होती हैं।

35 से 40 मिनट फिजिकल एक्टिविटी से फील गुड केमिकल्स का स्त्राव होता है।
8—11 बजे सुबह के समय सूरज की किरणों में बैठने से विटामिन-डी मिलता है।

लक्षण व्यक्ति को किसी भी चीज या काम में दिलचस्पी कम होने लगती है और शरीर में ऊर्जा का स्तर कम होने लगता है। हर वक्त आलस, नींद न आना व भूख कम लगना अहम लक्षण हैं।

डिप्रेशन से ऐसे बचें
एक्टिव रहने से हमारा शरीर फील गुड कैमिकल्स का स्त्राव करता है जो अवसाद जैसी भावना को कम करते हैं। रोजाना 30 मिनट की वॉक या किसी तरह की एक्सरसाइज लाभकारी है। जिम की बजाए हल्की एक्सरसाइज या योग-प्राणायाम भी काफी है। इसके अलावा जो लोग अपना समय केवल घर या ऑफिस के अंदर ही बिताते हैं उन्हें कुछ समय के लिए धूप में बैठना चाहिए। खानपान में विटामिन-सी व डी ज्यादा लें। इनसे अवसाद की गंभीरता कम होने लगती है। जितना ज्यादा हो सके दोस्तों या रिश्तेदारों के साथ समय बिताएं। कुछ मामलों में मेडिटेशन से शारीरिक और मानसिक तालमेल भी बना रहता है।