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देसी तकनीक से दी जाएगी बीमारियों को मात

दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना के शुभारंभ के साथ ही हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थापना में भी अब तेजी शुरू होगी।

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दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना के शुभारंभ के साथ ही हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थापना में भी अब तेजी शुरू होगी। रविवार को झारखंड के रांची में प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना का शुभारंभ करने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को भी शुरू किया। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन सेंटर पर लोगों को कैंसर, मधुमेह, हाइपरटेंशन और किडनी जैसी बीमारियों का उपचार मिलेगा।

उप स्वास्थ्य केंद्रों को तकनीक के जरिए नया रूप देने के बाद यहां आयुर्वेद और एलोपैथी का मिश्रित उपचार मिल सकेगा। इसके लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), सीएसआईआर और डीआरडीओ के शोधों को शामिल किया है। इसमें सरकार की नीरी केएफटी, बीजीआर-34, ल्यूकोस्किन इत्यादि का समावेश है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि 30 वर्ष की उम्र में प्रत्येक व्यक्ति की स्क्रीनिंग शुरू की जाएगी। इस दौरान उसे रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर, किडनी और हड्डियों से जुड़ी परेशानियों की जांच की जाएगी। अगर मरीज को बीमारीग्रस्त पाया जाता है तो उसका इलाज भी वहीं किया जाएगा। इन सेंटरों पर आयुर्वेद और एलोपैथी, दोनों ही चिकित्सा पद्घति का उपचार उपलब्ध होगा।

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अधिकारी ने बताया कि मधुमेह के लिए बीजीआर-34, किडनी के लिए नीरी केएफटी और त्वचा रोग के लिए ल्यूकोस्किन सरकार की बड़ी उपलब्धियां हैं। इन्हीं उपलब्धियों को अब सरकार आम जनता की सेवा में लगाना चाहती है।

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अधिकारी ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना का शुभारंभ होने के साथ ही अब मंत्रालय का पूरा फोकस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वास्थ्य योजनाओं को कागजों से यथार्थ में तब्दील क रना है। कुछ दिन बाद मंत्रालय की अहम बैठक में गांव-गांव तक जेनेरिक दवाएं पहुंचाने को लेकर भी निर्णय लिया जाएगा। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के साथ ही ये जनऔषधि केंद्र स्थापित होंगे।