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शुगर लेवल को ऐसे जानें, दूर करें भ्रम

पहली बार पहचान के लिए डायबिटीज का टैस्ट लैब में कराने की सलाह दी जाती है।

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जयपुर

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Vikas Gupta

Nov 05, 2019

शुगर लेवल को ऐसे जानें, दूर करें भ्रम

Know about sugar level

शुगर लेवल को लेकर मरीजों में अक्सर असमंजस की स्थिति रहती है। अमरीकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस की तरफ से डायबिटीज लेवल का मानक घटाने की रिपोर्ट से भी मरीजों में भ्रम बढ़ गया। वे डॉक्टरों से सही लेवल व इलाज को लेकर पूछने लगे कि हमें क्या बदलाव करने हैं। जानते हैं इससे जुड़ी बातें।

इस कारण है भ्रम -
अमरीकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस की ओर से जारी बताई जा रही इस गाइड लाइन के मुताबिक अगर शुगर लेवल 250 एमजी/डीएल तक है तो मरीज डायबिटिक नहीं है जबकि अभी तक 200 एमजी/डीएल से अधिक शुगर लेवल पर डायबिटीज माना जाता है। लेकिन बाद में इसी एसोसिएशन ने खंडन करते हुए कहा कि हमने ऐसी कोई गाइड लाइन जारी नहीं की है।

कौन कराए एचबीए1सी -
केवल डायबिटीज रोगियों को यह टैस्ट तीन महीने में एक बार करवाते रहना चाहिए। इससे डायबिटीज की 3 महीने की हिस्ट्री का पता चलता है। वहीं सामान्य शुगर टैस्ट से सिर्फ उसी क्षण का शुगर लेवल पता चलता है जबकि शुगर लेवल बीच-बीच में घटता-बढ़ता रहता है जो अधिक खतरनाक होता है। यह टैस्ट किसी भी समय करा सकते हैं।

शुगर लेवल कितना सही-
शुगर की जांच दो बार होती है इसमें आईएफजी (खाली पेट) और आईजीटी (खाने के दो घंटे बाद) है। आईएफजी में शुगर लेवल 100 से कम है तो सामान्य और 101 से 125 है तो प्री डायबिटीक और 126 एमजी/डीएल से ऊपर है तो डायबिटीक हैं। इसी तरह आईजीटी 140 से कम है तो सामान्य, 140-200 है तो प्री डायबिटीक और 200 एमजी/डीएल से ऊपर है तो डायबिटीक हैं। खाने की बाद की जांच हैवी ब्रेकफास्ट लेने या ग्लूकोज देकर भी करते हैं। इसमें मरीज को 75 ग्राम ग्लूकोज 300 मिली. पानी में घोलकर 10 मिनट में पिलाकर टैस्ट करते हैं।

शुगर बढ़ने से इंफेक्शन का खतरा -
शुगर लेवल बढ़ने से हार्ट की बीमारियां, ब्लड प्रेशर, आंखों, किडनी और नव्र्स को नुकसान होता है। साथ ही स्किन और यूरिन में बार-बार इंफेक्शन होने लगता है। छोटा घाव भी शुगर के कारण जल्द नहीं भरता है। इससे पूरे शरीर में इंफेक्शन फैल जाता है।

लो शुगर से हार्ट अटैक का खतरा -
हाई शुगर (हाइपर ग्लाइसीमिया) की तुलना में लो शुगर (हाइपोग्ला इसीमिया) अधिक खतरनाक होता है। लो शुगर में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो अधिक शुगर लेवल की तुलना में शुगल लेवल का बार-बार कम-ज्यादा होना ज्यादा नुकसानदायक होता है।

पेट मोटा व हाथ-पैर पतले ठीक नहीं -
भारत में अन्य देशों की तुलना में डायबिटीज रोगी 10 साल पहले हो जाते हैं। इसकी वजह पेट मोटा और हाथ-पैर पतला होना है। ऐसे लोगों में इंसुलिन रेसिस्टेंस होने से हार्मोन्स लेवल बिगड़ जाता है।

ये लक्षण दिखें तो कराएं शुगर टैस्ट -
तेजी से वजन कम होना, थकान, कमजोरी, यूरिन ज्यादा होना, रात में कई बार यूरिन होना, नींद अधिक आना, भूख और प्यास पहले से ज्यादा लगना, बार-बार इंफेक्शन और खुजली होना इसके शुरुआती लक्षण हैं।